अयोध्या में प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर के चढ़ावे और दान राशि में करोड़ों रुपये की भारी वित्तीय अनियमितता और गबन के गंभीर आरोपों ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस बड़े विवाद की शुरुआत समाजवादी पार्टी के नेता पवन पांडेय और राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा सोशल मीडिया पर उठाए गए तीखे सवालों से हुई, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों से लेकर आम जनता के बीच भारी आक्रोश फैल गया। विपक्ष के हमलों और देश भर में मचे बवाल के बाद, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े निर्देशों पर शासन ने 13 जून को तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत (IAS) की कमान में बनी इस उच्च स्तरीय समिति ने 15 जून से अयोध्या में डेरा डालकर अपनी विस्तृत जांच शुरू कर दी है, जिसका राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा और ट्रस्ट के सदस्य गोपाल राव ने भी स्वागत किया है। वहीं दूसरी ओर, यह संवेदनशील मामला अब सुप्रीम कोर्ट की दहलीज तक भी पहुंच गया है, जहां अधिवक्ता अनूप प्रकाश अवस्थी ने याचिका दायर कर अदालत की निगरानी में सीबीआई (CBI) जांच कराने और तुरंत एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।