राजस्थान को लंबे समय तक अपनी सामंती परंपराओं, पुरुष प्रधान सामाजिक व्यवस्था और रूढ़िवादी मान्यताओं के लिए जाना जाता रहा है। पंचायतों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू होने के बावजूद वर्षों तक 'सरपंच पति' जैसी प्रवृत्तियां हावी रहीं और महिलाओं के अधिकार अक्सर केवल औपचारिकता बनकर रह गए। हालांकि अब समय बदल रहा है। समाज की सोच में धीरे-धीरे सकारात्मक परिवर्तन दिखाई देने लगा है। इसका ताजा उदाहरण पाली और नागौर में देखने को मिला, जहां सदियों पुरानी परंपराओं को समय के अनुरूप नया स्वरूप देते हुए दो नन्हीं बेटियों को परिवार और ठिकाने की आधिकारिक उत्तराधिकारी घोषित किया गया। इन दोनों घटनाओं ने बेटियों को समान अधिकार देने की दिशा में एक नई सामाजिक मिसाल पेश की है।