कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बजरंग दल को लेकर दिए गए बयान पर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने राहुल गांधी से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है और कहा है कि यदि वे ऐसा नहीं करते हैं तो संगठन उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने पर विचार करेगा। यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब राहुल गांधी ने बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आरोप लगाया कि दिल्ली और अन्य स्थानों पर नीट आंदोलन में शामिल छात्रों पर बजरंग दल के सदस्यों ने हमला किया। राहुल गांधी के इस बयान के बाद विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने इसे पूरी तरह निराधार बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई।
वीएचपी का कहना है कि राहुल गांधी ने बिना किसी ठोस प्रमाण के बजरंग दल की छवि खराब करने की कोशिश की है। संगठन का आरोप है कि इस तरह के बयान न केवल कार्यकर्ताओं की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाते हैं बल्कि समाज में भ्रम की स्थिति भी पैदा करते हैं। विश्व हिंदू परिषद ने स्पष्ट किया कि यदि राहुल गांधी अपने बयान पर माफी नहीं मांगते हैं तो उनके खिलाफ मानहानि सहित अन्य कानूनी विकल्पों पर विचार किया जाएगा।
राहुल गांधी के बयान पर वीएचपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "राहुल गांधी झूठ के पर्याय बन चुके हैं। लगातार बात-बात पर झूठ बोलना, राष्ट्रवादी संगठनों के ऊपर कीचड़ उछालना... संसद में हो या संसद के बाहर, चाहे नेता प्रतिपक्ष हों, लेकिन उन्हें उस पद की मर्यादा की भी परवाह नहीं है। उसकी गरिमा को तार-तार करने में वे कभी नहीं चूकते। आज जिस तरह से उन्होंने संसद में और संसद के बाहर बयान दिए हैं, उससे पूरा देश हैरान है कि उन्होंने किस तरह की भाषा का उपयोग किया है।"
विनोद बंसल ने आगे कहा कि राहुल गांधी को अपने पुराने बयानों से सबक लेना चाहिए। उन्होंने कहा, "आज जिस तरह से उन्होंने बजरंग दल का नाम लिया है, शायद वे भूल गए कि कर्नाटक में भी उन्होंने बजरंग दल पर इसी तरह के आरोप लगाए थे और उसका राजनीतिक परिणाम उन्हें भुगतना पड़ा था। बार-बार माफी मांगना उनकी आदत बन गई है। राहुल गांधी, कुछ तो शर्म कीजिए और अपने बयान पर माफी मांगिए। कहीं ऐसा न हो कि आप फिर से किसी कानूनी विवाद में फंस जाएं।"
इस पूरे विवाद के बाद बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद ने राहुल गांधी के बयान को संगठन की छवि धूमिल करने का प्रयास बताया है, जबकि कांग्रेस की ओर से इस मुद्दे पर आगे क्या रुख अपनाया जाएगा, इस पर राजनीतिक हलकों की नजर बनी हुई है।