संसद का मानसून सत्र वैसे तो ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और अन्य विधायी कामों के लिए तय था, लेकिन हकीकत यह है कि सदन की ज़्यादातर कार्यवाही सिर्फ एक ही मुद्दे पर थमी हुई है मतदाता सूची में गड़बड़ी और ‘वोट चोरी’ के आरोप। इसी पृष्ठभूमि में सोमवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के चैंबर में विपक्षी गठबंधन ‘INDIA’ के नेताओं की अहम बैठक हुई। बैठक में सबसे बड़ा विषय रहा क्या मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ संसद में महाभियोग प्रस्ताव लाया जाए?
दरअसल, रविवार को ही चुनाव आयोग ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर यह स्पष्ट कर दिया था कि विपक्ष की तरफ से पेश किए गए आंकड़े उनके नहीं हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा था- “या तो इन आरोपों पर शपथपत्र देकर प्रमाणित करें या फिर पूरे देश से माफी मांगे। तीसरा कोई विकल्प नहीं है। यदि सात दिनों में हलफनामा नहीं मिला तो इन आरोपों को निराधार मान लिया जाएगा।”
इस बयान के बाद विपक्ष का आक्रोश और भड़क गया। कई नेताओं का मानना है कि चुनाव आयोग विपक्ष को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश कर रहा है, जबकि आरोप मूल रूप से भाजपा सरकार पर हैं।
बैठक के बाद कांग्रेस के राज्यसभा सांसद सैयद नसीर हुसैन ने कहा कि विपक्ष लोकतंत्र के तहत उपलब्ध हर शक्ति का इस्तेमाल करेगा। हुसैन बोले- “अभी तक महाभियोग पर कोई औपचारिक चर्चा नहीं हुई है। लेकिन जरूरत पड़ी तो महाभियोग प्रस्ताव सहित हर कदम उठाने के लिए विपक्ष तैयार है।”
इस बयान से साफ है कि विपक्ष अब पीछे हटने को तैयार नहीं है और मानसून सत्र में इस मुद्दे को बड़ा राजनीतिक हथियार बनाएगा।
संसद में लगातार हंगामा
21 जुलाई को मानसून सत्र शुरू होने के बाद से ही सदन की कार्यवाही बार-बार ठप हो रही है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर चर्चा को छोड़ दें तो लोकसभा और राज्यसभा में लगभग हर दिन SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन ऑफ वोटर लिस्ट) का मुद्दा छाया हुआ है। विपक्ष का आरोप है कि SIR दरअसल एक “साज़िश” है, जिससे बिहार विधानसभा चुनाव से पहले लाखों मतदाताओं को मताधिकार से वंचित किया जा सके।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने चुनाव आयोग और सरकार दोनों पर सीधा हमला बोला। राहुल ने कहा-
“चुनाव आयोग मुझसे हलफनामा मांगता है। लेकिन जब भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर भी वही आरोप लगाते हैं, तो उनसे क्यों नहीं? क्या कानून सिर्फ विपक्षी नेताओं के लिए है?”
राहुल के इस बयान से माहौल और गरमा गया। विपक्ष इसे “दोहरी राजनीति” बता रहा है और चुनाव आयोग पर पक्षपात का आरोप लगा रहा है।
वहीं, भाजपा का रुख बिल्कुल अलग है। पार्टी का कहना है कि विपक्ष तथ्यों के बजाय भ्रम फैलाने का काम कर रहा है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरन रिजिजू ने सोमवार को कहा-
“विपक्ष को संसद की कार्यवाही नहीं रोकनी चाहिए। यदि कोई मुद्दा है तो चर्चा के लिए सदन सबसे उचित मंच है। बार-बार हंगामा करके लोकतांत्रिक परंपराओं को कमजोर करना गलत है।”
भाजपा नेताओं का मानना है कि कांग्रेस और सहयोगी दल जनता का विश्वास खोने के डर से चुनाव आयोग पर हमला कर रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, महाभियोग प्रस्ताव लाना आसान नहीं है। इसके लिए संसद में बड़ी संख्या में समर्थन चाहिए। विपक्षी दलों की एकता भी परखी जाएगी- क्या वे सचमुच एकजुट होकर महाभियोग की राह पकड़ेंगे या यह केवल दबाव बनाने की रणनीति है?
फिलहाल इतना तय है कि आने वाले दिनों में संसद का मानसून सत्र और गरमाएगा। एक तरफ विपक्ष चुनाव आयोग की “पक्षपाती कार्यशैली” का मुद्दा उठाता रहेगा, वहीं सरकार इस हंगामे को “अवरोध की राजनीति” बताकर जनता के सामने पेश करेगी।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर महाभियोग प्रस्ताव की चर्चा ने भारतीय राजनीति का माहौल और तनावपूर्ण बना दिया है। राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं के आरोपों से जहां सत्तापक्ष पर दबाव बढ़ रहा है, वहीं सरकार इसे केवल राजनीतिक नाटक बताकर खारिज कर रही है। आने वाले हफ्तों में यह देखना दिलचस्प होगा कि विपक्ष वाकई महाभियोग प्रस्ताव की दिशा में कदम बढ़ाता है या फिर यह केवल संसद और सियासत में दबाव की रणनीति भर साबित होती है।