राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने देश के नाम दिए अपने आखिरी संबोधन में शिक्षा, वातावरण, गरीबी और समाज में चल रही हिंसा के बारे में बात की। प्रणब मुखर्जी ने कहा कि, संविधान उनके लिए पवित्र किताब रही, संसद उनका मंदिर और लोगों की सेवा करना उनका एक मात्र ध्येय।