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Mamata Banerjee In Supreme Court : SIR पर ममता ने की सुप्रीम कोर्ट में बहस, TMC नेता ने किया खुलासा!

वीडियो डेस्क, अमर उजाला डॉट कॉम Updated Thu, 05 Feb 2026 03:00 AM IST

TMC नेता कुणाल घोष ने कहा, "मुख्यमंत्री खुद सुप्रीम कोर्ट में, चीफ जस्टिस के सामने अपने राज्य के नागरिकों के अधिकारों की रक्षा कर रही हैं। यह एक ऐतिहासिक घटना बन गई है और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने आज ममता बनर्जी द्वारा उठाए गए मुद्दों को स्वीकार किया, उनकी प्रासंगिकता और महत्व से सहमत होते हुए। सुप्रीम कोर्ट ने दखल दिया, चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया और कहा कि तार्किक विसंगतियों के नाम पर हो रही उत्पीड़न नहीं होना चाहिए.सुप्रीम कोर्ट चुनाव आयोग को भाजपा से प्रभावित होने से बचाने का रास्ता ढूंढ रहा है। यह एक नैतिक जीत है और यह ममता बनर्जी के करिश्मे और जनता के अधिकारों के लिए लड़ने की भावना को दिखाता है.ममता बनर्जी ने जिस बात पर ज़ोर दिया था, उसे स्वीकार कर लिया गया है, उसके महत्व को स्वीकार कर लिया गया है, सुप्रीम कोर्ट ने इस समस्या को स्वीकार किया है

SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन को लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में जोरदार बहस की, जिसका खुलासा खुद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के एक वरिष्ठ नेता ने किया है। TMC नेता के अनुसार, ममता बनर्जी ने अदालत में स्पष्ट शब्दों में कहा कि चुनाव से ठीक पहले मतदाता सूची में इस तरह का व्यापक संशोधन लोकतंत्र की मूल भावना के खिलाफ है और इससे लाखों वैध मतदाताओं के नाम हटाए जाने का खतरा पैदा हो सकता है। उन्होंने दलील दी कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन का इस्तेमाल पहले भी राजनीतिक लाभ के लिए किया गया है और इसका सबसे ज्यादा असर गरीब, प्रवासी मजदूरों, अल्पसंख्यकों और हाशिए पर रहने वाले वर्गों पर पड़ता है। ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि बंगाल जैसे राज्य में बड़ी संख्या में लोग रोज़गार के कारण अस्थायी रूप से दूसरे राज्यों में रहते हैं और अगर इस दौरान SIR लागू किया गया तो वे अपने मतदान के अधिकार से वंचित हो सकते हैं।


TMC नेता ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग की मंशा और समय पर सवाल उठाते हुए पूछा कि जब नियमित प्रक्रिया पहले से मौजूद है, तो अचानक इतने बड़े पैमाने पर संशोधन की जरूरत क्यों महसूस की गई। बहस के दौरान ममता बनर्जी ने संविधान के अनुच्छेदों का हवाला देते हुए कहा कि मतदान का अधिकार लोकतांत्रिक व्यवस्था की रीढ़ है और किसी भी प्रशासनिक फैसले से इसे कमजोर नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार अप्रत्यक्ष रूप से चुनाव आयोग पर दबाव बनाकर राज्यों में राजनीतिक संतुलन बिगाड़ने की कोशिश कर रही है। TMC नेता के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मुद्दे की गंभीरता को समझते हुए सभी पक्षों की दलीलें ध्यान से सुनीं और चुनाव आयोग से प्रक्रिया की पारदर्शिता, समय-सीमा और दिशा-निर्देशों पर विस्तृत जवाब मांगा है। इस खुलासे के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है और विपक्षी दलों ने भी SIR को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर की हैं। TMC का कहना है कि वह सड़क से लेकर अदालत तक इस मुद्दे पर संघर्ष जारी रखेगी ताकि किसी भी कीमत पर बंगाल के मतदाताओं के अधिकारों से समझौता न हो। वहीं, पार्टी नेताओं का दावा है कि ममता बनर्जी की इस कानूनी लड़ाई से न केवल बंगाल बल्कि पूरे देश में चुनावी प्रक्रियाओं की निष्पक्षता को लेकर एक बड़ा संदेश जाएगा।

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