इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट से इंडिगो की कई उड़ानों के अचानक रद्द होने ने हजारों यात्रियों की यात्रा योजनाओं को अस्त-व्यस्त कर दिया। जो यात्री समय पर अपने गंतव्य तक पहुंचने की उम्मीद लेकर एयरपोर्ट आए थे, उन्हें हालात कुछ ऐसे मिले कि परेशानी उनके साथ घर तक लौट गई। उड़ानें रद्द होने का असर केवल आसमान में उड़ने वाली सेवाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जमीन पर भी इसका संकट गहराता गया। एयरपोर्ट के भीतर अव्यवस्था बढ़ी, बाहर टैक्सियों ने मनमाना किराया वसूला, और अन्य एयरलाइंस ने भी इस अवसर पर अपने टिकट दामों में भारी बढ़ोतरी कर दी। कुल मिलाकर, स्थिति ऐसी बन गई कि ‘वर्ल्ड क्लास’ कहे जाने वाले एयरपोर्ट पर यात्रियों को किसी रेलवे स्टेशन जैसी अफरातफरी झेलनी पड़ी।
इंडिगो के परिचालन संकट के कारण आईजीआई एयरपोर्ट से निकलने वाली कई उड़ानें रद्द की गईं। इससे सबसे ज्यादा मार उन यात्रियों पर पड़ी जिन्हें जरूरी काम, मीटिंग, इवेंट या निजी कारणों से तत्काल यात्रा करनी थी। दिल्ली-मुंबई जैसा व्यस्त रूट तो इसकी चपेट में पूरी तरह आ गया। सामान्य दिनों में जहां एकतरफा किराया 4,500 से 6,000 रुपये के बीच रहता है, वहीं उड़ानें रद्द होने के बाद यह किराया रातोंरात 25,000 से 30,000 रुपये तक पहुंच गया। एक यात्री ने हताश होकर बताया "मेरी इंडिगो की फ्लाइट कैंसिल हो गई। दूसरी एयरलाइन में जब सीट बुक करने की कोशिश की तो किराया तीन गुना से भी ज्यादा दिखा। मजबूरी में वही बुक करनी पड़ी।” 6 दिसंबर को दिल्ली से मुंबई जाने की कोशिश करने वाले यात्रियों को 30,000 रुपये तक का टिकट खरीदना पड़ रहा है। यह स्थिति केवल एक रूट तक सीमित नहीं रही; कई अन्य शहरों के लिए भी टिकट दरों में कई गुना उछाल आया।
इंडिगो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि एयरलाइंस की इस मनमानी के बाद केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने कड़ा रूख अपनाया। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि संकट की घड़ी में एयरलाइंस टिकट दामों को नियंत्रित रखें। मंत्री ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि किसी भी एयरलाइन ने किराया अनुचित रूप से बढ़ाया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, और भारी जुर्माने का प्रावधान भी लागू किया जा सकता है। यात्रियों की शिकायतों को ध्यान में रखते हुए मंत्रालय भी हालात पर नजर बनाए हुए है।