आपदा के 11 दिन बाद भी सराज घाटी के प्रभावित गांवों में सन्नाटा पसरा है। देजी, थुनाग और रूशाड़ से लापता लोगों के घरों में मातम छाया है। हर आंख में आंसुओं का सैलाब है। बाढ़ ने न सिर्फ घर उजाड़े, बल्कि ऐसे जख्म दिए, जो शायद कभी न भरें। सरकारी आंकड़ों के अनुसार आपदा से अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 27 लोग लापता हैं। लोग कांपते हाथों से मलबे में अपनों की तलाश कर रहे हैं।
टेलर इंद्र सिंह की पत्नी और तीन बेटियां बाढ़ में बह गईं। उनका घर मलबे का ढेर बन गया। इंद्र अब उस जगह को देखना भी नहीं चाहता। बेटियों की यादें उसे हर पल सताती हैं। वह टूट चुका है, जीने की वजह खो चुका है।