महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा, "जब उनकी(विपक्ष) जीत होती है तब वे वोट चोरी नहीं बोलते हैं, हारने पर वोट चोरी की बात करते हैं... जब उन्हें लोकसभा चुनाव में महाराष्ट्र में ज़्यादा सीटें मिलीं, तो क्या उन्होंने EVM, चुनाव आयोग को मैनेज किया था क्या? वोट चोरी की? जब वे तेलंगाना, कर्नाटक में जीते, तो क्या उन्होंने EVM, चुनाव आयोग को मैनेज किया? हारने के बाद ऐसा कहना ग़लत है। चुनाव आयोग ने भी कहा है कि अगर सबूत हैं तो दें, वरना माफ़ी मांगें। बार-बार आरोप लगाने से आरोप साबित नहीं होते। ये मतदाताओं का अपमान है, महाराष्ट्र की जनता का अपमान है... हम महायुति के ढाई साल के काम के दम पर जीते हैं, अगर वे इसी तरह अपमान करेंगे तो स्थानीय निकाय चुनाव में बुरी तरह हारेंगे... वे प्रधानमंत्री पर आरोप लगाते हैं, सेना के जवानों पर आरोप लगाते हैं। ये कैसा देशप्रेम है?... महाराष्ट्र की जनता उन्हें जवाब दे चुकी है, वे बिहार चुनाव भी हारने वाले हैं, इसलिए वे इसके लिए ज़मीन तैयार कर रहे हैं। अगर वे ऐसे आरोप लगाएंगे तो हर चुनाव हारेंगे.
गुरुवार को दावा किया कि भाजपा और चुनाव आयोग के बीच मिलीभगत के कारण चुनावों में ‘‘बड़ी आपराधिक धोखाधड़ी’’ हुई है। उन्होंने इसके लिए पिछले साल कर्नाटक के एक निर्वाचन क्षेत्र में मतदाता सूची के विश्लेषण का हवाला दिया। इसके एक दिन बाद उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग और भाजपा ने मिलकर लोगों से लोकसभा चुनाव "चुराया" और कम से कम तीन राज्यों में "वोट की चोरी" हुई।
गांधी ने यह भी आरोप लगाया था कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजों ने कांग्रेस के इस संदेह की पुष्टि की है कि वोट चुराए गए थे।
ऐसे आरोपों के बारे में पूछे जाने पर शिंदे ने किसी का नाम लिए बिना विपक्ष की सार्वजनिक रूप से 'बेतुके आरोप' लगाने के लिए आलोचना की।उन्होंने कहा, "अगर उनके पास सबूत हैं तो उन्हें अदालत या चुनाव आयोग के पास जाना चाहिए। इस तरह के निराधार दावे करके उन्होंने महाराष्ट्र के नागरिकों का अपमान किया है जिन्होंने महायुति (भाजपा, शिवसेना और राकांपा) को चुना है, साथ ही उन्होंने हमारी बहनों, भाइयों, किसानों और राज्य के लोगों का भी अपमान किया है।"
राहुल गांधी द्वारा यह आरोप लगाए जाने के तुरंत बाद कि "वोट चोरी" हमारे लोकतंत्र पर एक "परमाणु बम" है, कर्नाटक और महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों ने पूर्व कांग्रेस प्रमुख से उन मतदाताओं के नाम साझा करने को कहा था, जिनके बारे में उन्होंने दावा किया था कि वे मतदाता सूची में "गलत" हैं। साथ ही चुनाव अधिकारियों को मामले में "आवश्यक कार्यवाही" शुरू करने के लिए हस्ताक्षरित घोषणापत्र भी मांगा था। चुनाव आयोग ने शुक्रवार को गांधी पर उच्चतम न्यायालय द्वारा निपटाए गए चुनाव अनियमितताओं के पुराने आरोपों को दोहराने का आरोप लगाया और कांग्रेस नेता से कहा कि वे मतदाता सूची में गलत प्रविष्टियों के बारे में अपने दावों पर लिखित घोषणा करें या माफी मांगें।