दतिया विधानसभा उपचुनाव के बाद नवनिर्वाचित कांग्रेस विधायक घनश्याम सिंह के एक बयान ने मध्य प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। एक सम्मान समारोह के दौरान दिए गए उनके भाषण का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित हो रहा है। इस वीडियो में घनश्याम सिंह ने उपचुनाव के दौरान प्रशासनिक तंत्र पर कथित रूप से सरकार के दबाव में काम करने का आरोप लगाया है। उन्होंने ग्वालियर रेंज के डीआइजी असित यादव और जिला पंचायत दतिया के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अक्षय तेम्रवाल पर भी चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश किए जाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि, विधायक द्वारा लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारियों की ओर से इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया सामने आना अलग से महत्वपूर्ण होगा।
घनश्याम सिंह ने अपने बयान में दतिया के तत्कालीन कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े और पुलिस अधीक्षक मयूर खंडेलवाल की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि दोनों अधिकारियों ने चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराया। विधायक के अनुसार, प्रशासनिक स्तर पर दबाव की स्थिति के बावजूद इन अधिकारियों ने किसी प्रकार की कथित अनियमितता को बढ़ावा नहीं दिया और चुनाव के दौरान निष्पक्षता बनाए रखने का प्रयास किया। उनके इस बयान का यह हिस्सा इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि उन्होंने प्रशासन के कुछ अधिकारियों पर आरोप लगाने के साथ ही जिला प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों को निष्पक्ष चुनाव कराने का श्रेय दिया है।
विधायक ने उपचुनाव के दौरान दतिया में की गई पुलिस अधिकारियों की पदस्थापनाओं को लेकर भी सवाल उठाए। उनका दावा है कि चुनाव के बीच जिन नए थाना प्रभारियों और टीआई की नियुक्तियां की गईं, उनमें से अधिकांश कथित तौर पर भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के समर्थक थे। घनश्याम सिंह ने आरोप लगाया कि इन अधिकारियों ने चुनाव के दौरान कथित रूप से निष्पक्ष तरीके से काम नहीं किया और चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने वाली भूमिका निभाई। हालांकि, इन दावों के समर्थन में सार्वजनिक रूप से उपलब्ध तथ्यों या स्वतंत्र जांच की पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।
घनश्याम सिंह के इस बयान के सामने आने के बाद दतिया की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज होने की संभावना है। कांग्रेस विधायक के आरोपों को लेकर भाजपा की प्रतिक्रिया भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा सकती है। पूरे मामले में अब यह देखना अहम होगा कि जिन अधिकारियों पर आरोप लगाए गए हैं, वे इन दावों पर क्या स्पष्टीकरण देते हैं और क्या चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने के आरोपों की किसी आधिकारिक स्तर पर जांच होती है। फिलहाल, वायरल वीडियो और विधायक के बयान ने दतिया विधानसभा उपचुनाव को लेकर राजनीतिक बहस को फिर से गर्म कर दिया है।