उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बाबरी मस्जिद से जुड़े हालिया बयान ने एक बार फिर सियासी हलकों में चर्चा तेज कर दी है। उन्होंने अपने बयान में कहा, “कायदे में रहोगे तो फायदे में रहोगे,” जिसे कानून-व्यवस्था, न्यायिक प्रक्रिया और सामाजिक अनुशासन से जोड़कर देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब देश में अयोध्या राम मंदिर निर्माण के बाद सामाजिक समरसता, कानून के पालन और ऐतिहासिक विवादों को लेकर नई बहसें सामने आ रही हैं। योगी आदित्यनाथ का कहना है कि बाबरी मस्जिद से जुड़ा विवाद संविधान और न्यायपालिका के दायरे में सुलझाया गया, और यह उदाहरण है कि अगर सभी पक्ष कानून का सम्मान करें तो समाधान संभव है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अराजकता, हिंसा या कानून तोड़ने से किसी को लाभ नहीं होता, बल्कि समाज में तनाव और अस्थिरता बढ़ती है। मुख्यमंत्री का यह बयान सीधे तौर पर उन तत्वों को संदेश देता है जो समय-समय पर विवादित मुद्दों को भड़काने की कोशिश करते हैं। योगी आदित्यनाथ ने अपने राजनीतिक जीवन में कानून-व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की छवि बनाई है और उनका यह बयान उसी सोच को प्रतिबिंबित करता है। समर्थकों का मानना है कि यह बयान स्पष्ट और सख्त संदेश है कि सरकार कानून के दायरे में रहकर ही काम करेगी और किसी भी तरह की अव्यवस्था को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
वहीं आलोचकों का कहना है कि इस तरह के बयान राजनीतिक ध्रुवीकरण को बढ़ा सकते हैं और संवेदनशील मुद्दों पर और सावधानी बरतने की जरूरत है। बाबरी मस्जिद विवाद भारत के इतिहास का एक अत्यंत संवेदनशील अध्याय रहा है, जिसने दशकों तक राजनीति और समाज दोनों को प्रभावित किया। ऐसे में मुख्यमंत्री का यह बयान सिर्फ अतीत की ओर इशारा नहीं करता, बल्कि भविष्य के लिए भी एक संदेश देता है कि अब विवाद नहीं, बल्कि विकास, शांति और कानून के शासन की बात होनी चाहिए। “कायदे में रहोगे तो फायदे में रहोगे” का नारा प्रशासनिक सख्ती के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी की भी बात करता है। यह बयान उन लोगों के लिए चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है जो कानून को हाथ में लेने की कोशिश करते हैं, और साथ ही आम नागरिकों को यह भरोसा भी देता है कि नियमों का पालन करने वालों को सुरक्षा और स्थिरता मिलेगी। कुल मिलाकर, योगी आदित्यनाथ का यह बयान एक राजनीतिक संदेश होने के साथ-साथ शासन और अनुशासन की उनकी नीति को भी रेखांकित करता है, जो आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक दिशा को प्रभावित कर सकता है।