“हिमाचल प्रदेश एक बार फिर प्रकृति के कहर का गवाह बना। पहाड़ों पर फटा बादल, घाटियों में बह निकली जिंदगियां… मंडी, करसोग, धर्मपुर और कुल्लू जैसे इलाके तबाही की चपेट में हैं। जहां एक ओर लोग मदद के लिए पुकारते रहे, वहीं दूसरी ओर मूसलाधार बारिश ने मकान, गोशालाएं, पुल और सड़कों को निगल लिया। ये रिपोर्ट सिर्फ आंकड़े नहीं, एक-एक दर्द की कहानी है जो इन बादलों के पीछे छुपी है।”
सोमवार रात से मंगलवार सुबह तक हिमाचल प्रदेश के मंडी, करसोग, गोहर और धर्मपुर इलाकों में मूसलाधार बारिश के बाद अचानक बादल फटने की कई घटनाएं दर्ज की गईं।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि केवल मंडी में ही आठ जगह बादल फटने की पुष्टि हुई है। अब तक की रिपोर्ट के अनुसार:
• 4 लोगों की मौत
• 16 लोग लापता
• 117 लोगों को बचाया गया
• 18 मकान और 12 गोशालाएं क्षतिग्रस्त
• 30 से अधिक मवेशी मरे
• प्रारंभिक नुकसान ₹500 करोड़ से अधिक का आंकलन
गोहर उपमंडल के स्यांज नाले में बनी एक मकान को फ्लैश फ्लड बहाकर ले गया। मां-बेटी को किसी तरह बचा लिया गया, लेकिन 7 लोग सैलाब में बह गए, जिनमें महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग शामिल हैं।
शिनाख्त किए गए लापता लोगों के नाम:
• पदम सिंह (75)
• देवकू देवी (70)
• झाबे राम (50)
• पार्वती देवी (47)
• सुरमि देवी (70)
• इंद्र देव (29)
• उमावती (27)
• कनिका (9)
• गौतम (7)
धर्मपुर के त्रियांबला गांव में 2 मकान और 5 गोशालाएं ढह गईं।
भदराणा गांव में 4 मकान और 3 गोशालाएं नष्ट हो गईं।
सराज क्षेत्र के बाड़ा और तलवाड़ा में भी लोग लापता हैं, वहीं कुछ बच्चों को सुरक्षित रेस्क्यू किया गया।
एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें, पुलिस और प्रशासन राहत व बचाव कार्यों में लगातार जुटे हुए हैं। मंडी शहर के विभिन्न हिस्सों से 11 लोगों को सुरक्षित निकाला गया।
सुजानपुर के खैरी गांव में ब्यास नदी का जलस्तर इतना बढ़ गया कि 5 से 7 घर पानी में घिर गए। पुलिस और प्रशासन ने 40 लोगों को रेस्क्यू किया, जिनमें 15 प्रवासी मज़दूर भी थे।
रघुनाथ का पधर (मंडी) में बाढ़ में फंसे 12 लोगों को देर रात रेस्क्यू किया गया। इनमें कई महिलाएं और बुजुर्ग शामिल थे। रेस्क्यू टीमों ने अंधेरे और बारिश के बीच जान जोखिम में डालकर उन्हें सुरक्षित निकाला।
बारिश और भूस्खलन की वजह से सैकड़ों सड़कें बंद हो गई हैं।
बिथल-किंगल सड़क, सैंज-लुहरी रोड, सदर क्षेत्र में भूस्खलन से आवागमन ठप हो गया है।
शैक्षणिक संस्थानों पर भी असर:
• मंडी, हमीरपुर, और कांगड़ा जिलों में 1 जुलाई को सभी स्कूल और कॉलेज बंद रखने के आदेश जारी किए गए हैं।
• डीसी मंडी और डीसी कांगड़ा ने भारी बारिश को देखते हुए निर्णय लिया।
ठियोग के जल शक्ति उपमंडल के अंतर्गत अधिकांश खड्डों और नालों में भारी गाद आने के कारण सभी लिफ्ट जलापूर्ति योजनाएं बाधित हो गई हैं।
कुल्लू में भी नदी-नाले उफान पर हैं और बांधों से पानी छोड़ा जा रहा है, जिससे और खतरा बढ़ गया है।
मौसम विभाग शिमला ने 1, 2 और 5 से 7 जुलाई तक ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।
3 व 4 जुलाई के लिए भी भारी बारिश की चेतावनी है।
सबसे ज्यादा बारिश संधोल (223.6 मिमी), मंडी (216.8 मिमी), पंडोह (215 मिमी), करसोग (160.2 मिमी) में दर्ज की गई है।
बाखली खड्ड पर बना 16 मेगावाट का पटिकरी पावर प्रोजेक्ट पूरी तरह तबाह हो गया है। हालांकि, यहां किसी के हताहत होने की खबर नहीं है लेकिन हजारों लोगों की बिजली व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा है कि हर लापता व्यक्ति की तलाश के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं। उन्होंने जनता से नदी-नालों के किनारे न जाने, बिना जरूरत घर से बाहर न निकलने और प्रशासनिक अलर्ट पर ध्यान देने की अपील की है।
यह घटना सिर्फ एक मौसमीय आपदा नहीं, बल्कि हिमाचल की जलवायु संवेदनशीलता की चेतावनी है। क्या हम वाकई तैयार हैं? क्या हमारे गांवों और कस्बों में आपदा प्रबंधन की योजनाएं ज़मीन पर हैं?
इन सवालों का जवाब ढूंढने से पहले, लापता लोगों के घरों में पसरा सन्नाटा और पानी में डूबे सपनों को देखना होगा।