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Chandra Grahan 2025: आज कब दिखेगा चंद्रग्रहण में Blood Moon, कब लगेगा सूतक काल, जानें हर जरूरी बात

Sun, 07 Sep 2025 09:20 AM IST
अभिलाषा पाठक वीडियो डेस्क, अमर उजाला डॉट कॉम

सात सितंबर की रात चंद्रग्रहण होगा। यह पूरे देश में देखा जा सकेगा। आज का चंद्र ग्रहण रात में 09:58 पी एम पर लगेगा. दृक पंचांग के अनुसार, चंद्र ग्रहण का उपच्छाया से पहला स्पर्श रात में 08:59 पी एम पर होगा और प्रच्छाया से पहला स्पर्श रात 09:58 पी एम पर होगा.यह 2022 के बाद भारत में दिखाई देने वाला सबसे लंबा पूर्ण चंद्रग्रहण होगा। 27 जुलाई, 2018 के बाद यह पहली बार होगा जब देश के सभी हिस्सों से पूर्ण चंद्रग्रहण देखा जा सकेगा। भाद्रपद पूर्णिमा के दिन इस साल का तीसरा चंद्र ग्रहण लगेगा। यह खग्रास चंद्र ग्रहण होगा, यानी जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीध में आ जाते हैं और चंद्रमा पृथ्वी की पूरी छाया में प्रवेश करता है। ज्योतिषीय दृष्टि से यह ग्रहण कुम्भ राशि और पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र पर घटित होगा। इस बार का चंद्र ग्रहण भारत सहित पूरे एशिया, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और अफ्रीका में साफ दिखाई देगा। इसके अलावा पश्चिमी, उत्तरी और पूर्वी अमेरिका, अटलांटिक, हिंद महासागर, प्रशांत महासागर और अंटार्कटिका क्षेत्र में भी इसकी झलक देखी जा सकेगी। खास तौर पर भारत, चीन, बांग्लादेश, म्यांमार, इंडोनेशिया, थाईलैंड, जापान, रूस, जर्मनी, तुर्की, फ्रांस, इटली, स्पेन, ब्रिटेन और नाइजीरिया जैसे देशों में यह खग्रास रूप में नज़र आएगा। वहीं पुर्तगाल, ब्राजील और अमेरिका के कुछ हिस्सों में यह आंशिक रूप से दिखाई देगा।

इस साल 7 सितंबर 2025 को लगने वाले चंद्र ग्रहण का सूतक काल दोपहर 12:19 बजे से शुरू होगा और इसकी समाप्ति अगले दिन यानी 8 सितंबर को रात 1:26 बजे होगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूतक काल में कई नियमों का पालन करना आवश्यक होता है।
खास बात यह है कि बच्चों, बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों के लिए सूतक की शुरुआत थोड़ी देर से मानी जाती है। उनके लिए सूतक शाम 6:36 बजे से प्रभावी होगा।भारतीय खगोलीय सोसाइटी (एएसआई) की जनसंपर्क और शिक्षा समिति (पीओईसी) की अध्यक्ष और नेशनल सेंटर फॉर रेडियो एस्ट्रोफिजिक्स, पुणे में एसोसिएट प्रोफेसर दिव्या ओबेरॉय के अनुसार आपको इसके बाद इतने लंबे चंद्रग्रहण को देखने के लिए 31 दिसंबर, 2028 तक इंतजार करना होगा। इस दौरान चंद्रमा लाल रंग का दिखाई देगा। लाल रंग के कारण ही इसे ब्लड मून ही कहते हैं। आइए जानते हैं इसके पीछे की वजह क्या है?

ब्लड मून का वैज्ञानिक कारण....
ब्लड मून एक खगोलीय घटना है, जो पूर्ण चंद्र ग्रहण के दौरान होती है। सूर्य और चंद्रमा के बीच जब पृथ्वी आती है, तो पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है, जिससे चंद्रमा लाल रंग का दिखाई देता है। दरअसल, पृथ्वी का वायुमंडल सूर्य के प्रकाश को बिखेरता है। छोटी वेवलेंथ जैसे नीले और हरा रंग की रोशनी पूरी तरह से बिखर जाती हैं, जबकि लंबी वेवलेंथ जैसे लाल रंग वायुमंडल से होकर गुजरती हैं। चंद्र ग्रहण के दौरान, सूर्य की लाल रोशनी ही पृथ्वी के वायुमंडल से होकर चंद्रमा तक पहुंच पाती है, जिससे चंद्रमा लाल दिखता है। सूर्य की किरणों का नीला रंग बिखरने के कारण ही आसमान नीला दिखाई देता है। वायुमंडल में धूल, प्रदूषण या ज्वालामुखी राख की मात्रा के आधार पर ब्लड मून का रंग गहरा या हल्का लाल हो सकता है। प्रोफेसर ओबेरॉय ने बताया कि ग्रहण दुर्लभ होते हैं और हर पूर्णिमा या अमावस्या को नहीं होते, क्योंकि चंद्रमा की कक्षा सूर्य के चारों ओर पृथ्वी की कक्षा से लगभग पांच डिग्री झुकी हुई है। चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है, जिससे उसकी छाया चंद्र सतह पर पड़ती है। ग्रहण की शुरुआत सात सितंबर को रात 8.58 बजे शुरू होगी। भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान में विज्ञान, संचार, जनसंपर्क और शिक्षा (स्कोप) अनुभाग के प्रमुख निरुज मोहन रामानुजम ने बताया कि सूर्य ग्रहण के विपरीत, पूर्ण चंद्र ग्रहण देखने के लिए किसी विशेष उपकरण की आवश्यकता नहीं होती है और इसे नंगी आंखों, दूरबीन या टेलीस्कोप से सुरक्षित रूप से देखा जा सकता है। आंशिक चंद्र ग्रहण सात सितंबर को रात 9.57 बजे से देखा जा सकता है। जवाहरलाल नेहरू तारामंडल की पूर्व निदेशक बीएस शैलजा ने बताया कि पूर्ण चंद्रग्रहण 11.01 बजे शुरू होने की संभावना है। मोहन ने बताया, ‘‘पूर्ण चंद्र ग्रहण रात 11.01 बजे से रात 12.23 बजे तक रहेगा और इसकी अवधि 82 मिनट की होगी। आंशिक चरण रात 1.26 बजे समाप्त होगा और ग्रहण सात सितंबर देर रात 2.25 बजे समाप्त होगा।’’ 

 

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