खून का कोई मजहब नहीं होता लेकिन इसकी जरूरत कब और किसे पड़ जाए कुदरत को भी नहीं पता। इसलिए रक्तदान को महादान कहा गया है। ऐसे ही रक्तदान का महाआयोजन लाइंस क्लब के सयहोग बरेली के इनवर्टिस यूनिवर्सिटी कैंपस में किया गया। खुशी के बात ये रही है खून देने वाला का तांता लग गया।