AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, ". तेजस्वी यादव के बगल में बैठे, VIP पार्टी के मुकेश भाई, जिन्हें अपने समुदाय के इतिहास पर पूरा भरोसा है, उन्होंने घोषणा की कि मल्ला समुदाय तेजस्वी के साथ है। मल्ला समुदाय बिहार की आबादी का 3% है। उन्होंने घोषणा की कि अगर उन्हें सत्ता मिली, तो वे उप-मुख्यमंत्री बनेंगे.अगर एक मल्ला का बेटा उप-मुख्यमंत्री बनेगा, तो बिहार का 17% अल्पसंख्यक समुदाय क्या करेगा? क्या वे सिर्फ़ दरी बिछाने के लिए हैं.अगर एक मल्ला का बेटा उप-मुख्यमंत्री बन सकता है, तो मोहम्मद का बेटा भी प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री बन सकता है.हमें अपने लक्ष्य हासिल करने से कोई नहीं रोक सकता
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने बिहार में तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाले महागठबंधन पर तीखा हमला बोला है, खासकर उपमुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के चयन और मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधित्व को लेकर।
ओवैसी का मुख्य तर्क यह है कि महागठबंधन, जो 'सामाजिक न्याय' की बात करता है, वह वास्तव में 'राजनीतिक भेदभाव' कर रहा है। उन्होंने सवाल उठाया है कि अगर 14% आबादी वाले यादव समुदाय से तेजस्वी यादव मुख्यमंत्री पद का चेहरा बन सकते हैं और करीब 3% आबादी वाले मल्लाह (मुकेश सहनी) को उप-मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया जा सकता है, तो 17-18% की बड़ी आबादी वाले मुस्लिम समुदाय को मुख्यमंत्री या उप-मुख्यमंत्री क्यों नहीं बनाया जाता?
उन्होंने सीधे तौर पर महागठबंधन की रणनीति में 'राजनीतिक पाखंड' बताया है और आरोप लगाया है कि मुस्लिम समुदाय को केवल वोट बैंक के रूप में देखा जाता है और उन्हें राजनीतिक हिस्सेदारी (नेतृत्व) से दूर रखा जा रहा है। ओवैसी ने मुसलमानों से "दरी बिछाने" की मानसिकता को छोड़कर बराबरी की मांग करने और अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने का आह्वान किया है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर महागठबंधन को उनसे डर लगता है या वे उन्हें भाजपा की "बी टीम" कहते हैं, तो भी वह वंचितों और गरीबों के लिए आवाज़ उठाते रहेंगे। ओवैसी ने तेजस्वी यादव और महागठबंधन पर मुस्लिम समुदाय की उपेक्षा करने और उन्हें उनका उचित राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं देने का आरोप लगाते हुए 'सामाजिक न्याय' की उनकी परिभाषा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।