अपनी पार्टी जन सुराज की पहली सूची जारी होने के बाद हुए हंगामे और नेताओं की नाराजगी पर उन्होंने कहा कि यह "घर-परिवार की बात है।" उन्होंने माना कि कुछ लोगों को टिकट न मिलने पर उनकी नाराजगी या निराशा होना स्वाभाविक है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जन सुराज में न पैसे का दबदबा है, न बाहुबल का असर है। उन्होंने कहा कि पार्टी समाज से किए गए वादे निभा रही है और बिहार में जन सुराज की व्यवस्था बनाने के लिए हजारों लोग मेहनत कर रहे हैं।
उन्होंने कहा है कि जन सुराज ने ऐसी व्यवस्था बनाई है कि आगामी बिहार विधानसभा चुनाव में हर समाज के अच्छे लोगों को टिकट दिया जाएगा। पहली सूची में जन सुराज ने 7 दलितों, 9 सवर्णों को टिकट दिया, और सूची में 7 महिला और 1 ट्रांसजेंडर उम्मीदवार भी शामिल हैं।
बिहार की राजनीति में सीटों के बंटवारे और गठबंधन को लेकर उन्होंने कहा कि यह सीटों के बंटवारे का नहीं, बल्कि "बिहार को लूटने का घमासान है।" उन्होंने 243 सीटों में से 40 मुस्लिम प्रत्याशी उतारने की घोषणा की है। इस संदर्भ में उन्होंने कहा कि सभी हिंदू बीजेपी के साथ नहीं हैं और बहुसंख्यक हिंदू भी बीजेपी के समर्थन में नहीं हैं, इसलिए उनका मकसद एक वैचारिक गठबंधन तैयार करना है। उन्होंने आरजेडी को चुनौती देते हुए कहा कि अगर उन्हें मुसलमानों की इतनी चिंता है, तो उन्हें उन सीटों पर मुस्लिम उम्मीदवार नहीं उतारने चाहिए, जहां जन सुराज मुस्लिम उम्मीदवार उतारती है।
उन्होंने अपनी पार्टी के लिए भविष्यवाणी करते हुए कहा है कि जन सुराज या तो 10 सीटें भी नहीं लाएगी या बहुमत में रहेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किंग मेकर बनने नहीं आए हैं और MLA बनना या सत्ता की चाबी लेना मकसद नहीं है। उन्होंने संकेत दिया था कि वह करगहर (जन्मभूमि के हिसाब से) या राघोपुर (कर्मभूमि के हिसाब से, जो तेजस्वी यादव का क्षेत्र है) से चुनाव लड़ सकते हैं, लेकिन बाद में खबर आई कि उन्होंने चुनाव न लड़ने का फैसला किया है।