फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bengal Election 2026: ममता ने कसा PM मोदी पर तंज, हिमंत बिस्वा सरमा ने किया जबरदस्त पलटवार!

वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम Updated Sun, 26 Apr 2026 06:45 AM IST

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बयान पर कहा, "प्रधानमंत्री को हर जगह जाने का अधिकार है। दीदी को इससे आपत्ति नहीं होनी चाहिए।प्रधानमंत्री गंगा में आए, पूरे विश्व ने देखा और इससे बंगाल का पर्यटन बढ़ता है। जब मेरे राज्य में प्रधानमंत्री आते हैं तो मैं बतौर मुख्यमंत्री उनका खुले दिल से स्वागत करता हूं। बंगाल के लिए कुछ भी अच्छा होगा तो दीदी उसका विरोध करेंगी. ममता बनर्जी प्रधानमंत्री का विरोध नहीं कर रहीं बल्कि वो बंगाल की साख का विरोध कर रही हैं।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के एक बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि देश के प्रधानमंत्री को कहीं भी जाने का पूरा अधिकार है और इस पर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उनका यह बयान उस संदर्भ में आया जब प्रधानमंत्री के पश्चिम बंगाल दौरे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई थी। हिमंत बिस्वा सरमा ने स्पष्ट रूप से कहा कि जब प्रधानमंत्री किसी राज्य में जाते हैं, तो वह केवल राजनीतिक दौरा नहीं होता, बल्कि उससे उस राज्य की पहचान, संस्कृति और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जब नरेंद्र मोदी गंगा में आए थे, तो उस दृश्य को पूरे विश्व ने देखा, जिससे पश्चिम बंगाल की छवि और पर्यटन को लाभ पहुंचा। उनके अनुसार, इस तरह की घटनाएं किसी भी राज्य के लिए गर्व की बात होनी चाहिए, न कि विवाद का विषय।

सरमा ने आगे कहा कि जब प्रधानमंत्री उनके राज्य असम आते हैं, तो वे एक मुख्यमंत्री के रूप में उनका खुले दिल से स्वागत करते हैं, क्योंकि इससे राज्य के विकास और पहचान को बल मिलता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ममता बनर्जी हर उस चीज का विरोध करती हैं, जो बंगाल के हित में हो सकती है। उनके बयान के अनुसार, यह विरोध केवल प्रधानमंत्री तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे पश्चिम बंगाल की साख और छवि को भी नुकसान पहुंचता है। उन्होंने कहा कि यदि कोई पहल राज्य के लिए सकारात्मक है, तो उसे राजनीति से ऊपर उठकर समर्थन मिलना चाहिए।

इस पूरे बयान के जरिए हिमंत बिस्वा सरमा ने यह संदेश देने की कोशिश की कि राष्ट्रीय नेतृत्व और राज्य सरकारों के बीच सहयोग की भावना होनी चाहिए। उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से यह भी संकेत दिया कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद, विकास और जनहित के मुद्दों पर एकजुटता जरूरी है। उनके इस बयान ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है और इसे लेकर विभिन्न दलों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। कुल मिलाकर, यह मामला केवल दो नेताओं के बीच की टिप्पणी नहीं, बल्कि केंद्र और राज्य के संबंधों तथा राजनीतिक दृष्टिकोण के अंतर को भी उजागर करता है।

Latest

विज्ञापन

Recommended

विज्ञापन
Next
एप में पढ़ें