एएआईबी द्वारा एयर इंडिया विमान दुर्घटना पर अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट जारी करने पर, इंडस विश्वविद्यालय के एविएशन विभाग के एचओडी कैप्टन उमंग एन जानी कहते हैं, "इसमें ईंधन कटने का उल्लेख है। जब ईंधन की आपूर्ति बंद हो जाती है, तो दोनों इंजन काम करना बंद कर देते हैं, और फिर जिस प्रकार की घटना हुई, वह संभव है... जब आप इंजन शुरू करते हैं, तो एक पूरा क्रम होता है। उस क्रम का पालन करना महत्वपूर्ण है, और यह प्रणाली स्वचालित रूप से इस पूरे क्रम का पालन करती है... यह एक प्रारंभिक रिपोर्ट है। अब, आगे की जांच हो सकती है। और अंतिम रिपोर्ट जो आएगी, यह संभव है कि हमें उसमें अधिक जानकारी और अधिक विवरण देखने को मिलेंगे"
एएआईबी ने अपनी रिपोर्ट की शुरुआत कुछ बुनियादी सूचनाओं से की है। रिपोर्ट में बताया गया है कि बीते 12 जून को एअर इंडिया का विमान पूरी तरह से नष्ट हो गया। इससे पांच इमारतों को गंभीर क्षति पहुंची। जांच में पाया गया कि टेकऑफ़ के समय विमान की गति सामान्य थी। हालांकि, जैसे ही फ्लाइट 180 नॉट्स की गति पर पहुंची, दोनों इंजनों के फ्यूल कटऑफ स्विच अचानक 'RUN' से 'CUTOFF' पोजीशन में चले गए। इससे ईंधन आपूर्ति रुक गई और दोनों इंजन बंद हो गए।
प्रारंभिक रिपोर्ट में कहा गया है कि बीते 12 जून को दोपहर करीब डेढ़ बजे टेकऑफ के समय विमान को ऊंचाई पर जाने में परेशानी होने लगी इस कारण विमान में लगी प्रणाली रैम एयर टर्बाइन (RAT) का भी इस्तेमाल किया गया। इसके अलावा विमान से मिले डाटा के विश्लेषण से पता लगा है कि पायलटोंने ऑक्सिलरी पावर यूनिट (APU) का ऑटो स्टार्ट और इंजनों को रीलाइट करने के प्रयास भी किए। एक इंजन कुछ हद तक रिकवर करने में सफल रहा, लेकिन इंजन-2 के पूरी तरह फेल होने के कारण विमान को बचाया नहीं जा सका।
फ्लाइट में रिकॉर्ड हुए डेटा के मुताबिक विमान को ऊंचाई पर ले जाने में नाकाम रहने पर पायलट ने एयर ट्रैफिक कंट्रोलर को आपात स्थिति की सूचना देने के लिए 'MAYDAY' कॉल दी, लेकिन समय और ऊंचाई इतनी कम थी कि कुछ ही सेकंड बाद एअर इंडिया का बोइंग ड्रीमलाइनर बी-787-8 क्रैश हो गया।