स्काउट एवं गाइड की राज्य पुरस्कार अवार्ड विजेता हिमाचल प्रदेश थ्रो बाल जूनियर टीम की कप्तान मानसी राणा ने कहा कि आज जो कुछ भी हूं मां की देन हूं। मां ही मेरी पहचान है मां से ही संसार है। कहदें हन मामा ठंडियां छामा,मां का मैं एक बीज हूं जो खुद धरती में दब जाती है। हर तरह का दाब बह सहकर एक वृक्ष विशाल बनाती है मां को मैं जादूगर कहूं जो सपनों को असल बनाती है। मन में आई जो बात अभी-अभी जाने बह कैसे जान जाती है। मां को बह छाया कहूं जो हर धूप से हमें बचाती है। वह एक नरम बिछौने जैसी अपनी बांहों में सुलाती है। जिसके अंश में मेरी संरचना और विकास हुआ जिसकी कोख में रख कर पांव, दुनियां का आभास हुआ। मेरी रगों में लहू बना जो दूध जिसकी छाती का। जिसका साया मेरे लिए ज्यों नक्षत्र हो स्वाति का, प्राणों से भी बढ़ कर चाहा, संकोच किया जरा नहीं, जिसकी बदौलत सजा ये मेरा आज का जहां है,वो औरत कोई और नहीं,वो तो मेरी मां है।