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Sirmour: हजारों श्रद्धालुओं ने रेणुका झील में लगाई आस्था की डुबकी, कार्तिक पूर्णिमा पर शाही स्नान को उमड़ा सैलाब

अंतरराष्ट्रीय रेणुकाजी मेले के अंतर्गत कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर शाही स्नान महात्म्य की परंपरा निभाई गई। जिसके चलते हजारों श्रद्धालुओं ने पवित्र रेणुका झील में आस्था की डुबकी लगा कर पुण्य कमाया। स्नान का यह सिलसिला प्रात: ब्रह्म मुर्हूत से शुरू होकर देर शाम तक चलता रहा। जैसे -जैसे दिन निकलता गया श्रद्धालुओं का हुजूम स्नान घाट की ओर बढ़ने लगा। स्नान महात्म्य को लेकर जिला प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा व सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध कर रखे थे। किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए चारर गोताखोरों को भी मौके पर तैनात रखा गया था। जिसके लिए पहली मर्तबा महेरुनाग डायवर्जिंग एशोसिएशन सुन्दरनगर के प्रशिक्षित गोताखोरों सेवाएं ली गई। सर्वप्रथम प्रात: ब्रह्म मुहूर्त में रेणुकाजी तीर्थ में स्थित संत महात्माओं ने रेणुका झील में शाही स्नान करके स्नान महात्म्य का शुभारंभ किया। इसके पश्चात बारी-बारी से सभी श्रद्धालुओं ने झील में डुबकी लगाकर पुण्य की कामना की। साथ ही रेणुका झील की परिक्रमा भी की और भगवान परशुराम व माता रेणुकाजी मंदिर में पूजा अर्चना करके अशीर्वाद भी प्राप्त किया। कार्तिक पूर्णिमा के दिन ऐतिहासिक रेणुका झील में स्नान करने की परंपरा शदियों पुरानी है। मान्यता के अनुसार इस दिन झील में स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। जिसके चलते पूरे उत्तरी भारत के श्रद्धालु इस दिन रेणुका झील में शाही स्नान करने पहुंचते हैं। स्नान के पश्चात ही ग्रामीणों ने अपने घरों से लाई देवताओं के नाम की भेंट को भी उनके चरणों में अर्पित किया। पूर्णिमा के शाही स्नान को लेकर श्रद्धालुओं में गजब का उत्साह दिखाई दिया। इस दौरान तीर्थ में स्थित निर्वाण आश्रम, गायत्री आश्रम व सन्यास आश्रम में विशाल भंडारों का आयोजन किया गया। जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।

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