संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। हिमपात से पहले बागवानों ने सेब के बगीचों में काट-छांट का काम तेजी से शुरू कर दिया है। समय पर काट-छांट पूरा न होने से अगली पैदावार की गुणवत्ता के प्रभावित होने की संभावना रहती है। विशेषज्ञों ने कहा कि बागवान फरवरी के अंत तक बगीचों में प्रूनिंग का कार्य पूरा करें। पतझड़ के बाद सेब के बगीचों में हर साल काट-छांट का कार्य शुरू हो जाता है। इस बार अभी तक पर्याप्त बर्फ न पड़ने के कारण बागवानों में सेब के पौधों की काट-छांट का काम निपटाने में ढील चल रही है। सेब की काट-छांट को फलों की गुणवत्ता बनाए रखने और अच्छी पैदावार के लिए जरूरी माना जाता है। पहले कई बार समय पर काट-छांट का कार्य पूरा न होने से हिमपात के दौरान सेब के पौधों को भारी नुकसान हो चुका है। इस बार खास हिमपात नहीं हुआ, लेकिन अब समय निकलता जा रहा है, इसलिए बागवानों ने काट-छांट के काम को शुरू कर दिया है।
प्रशिक्षित व्यक्ति से करवाएं कटिंग
बागवानी विशेषज्ञ डाॅ. नरेंद्र कायथ का कहना है कि सेब के बगीचों में काट-छांट का कार्य हर साल हिमपात से पहले पूरा किया जाना चाहिए। फरवरी के बाद काट-छांट नहीं की जा सकती है। उन्होंने बागवानों को सलाह दी है कि सेब की कटिंग का कार्य प्रशिक्षित व्यक्ति से करवाएं। काट-छांट के दौरान पौधे की सिधाई और सही दिशा के साथ-साथ अच्छी पैदावार का पूरा ध्यान रखना होगा। उन्होंने सलाह दी है कि पौधे की टहनियों को काटने के के बाद घाव पर अच्छी तरह पेस्ट लगाएं। टूटी टहनियों के स्थान पर नई टहनी तैयार करने के लिए कटिंग के दौरान ध्यान रखे, ताकि पौधे को कैंकर से बचाया जा सके। सेब के पौधे में कटे भाग पर साथ साथ पेस्ट लगाए।