विभिन्न संगठनों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल के चलते आज भारतीय जीवन बीमा निगम के कर्मचारी भी हड़ताल पर रहे। मंडी में कार्यालय के बाहर कर्मचारियों ने धरना प्रदर्शन करके केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। मंडी के शाखा सचिव राजपाल ने मीडिया से बातचीत में कहा कि एलआईसी में भर्ती एक गंभीर मुद्दा बन चुका है। वर्ष 1995 से 2024 के बीच एलआईसी की इन-फोर्स पॉलिसियों में लगभग 410 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि कर्मचारियों की संख्या में 49 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है। जिससे कार्य-परिस्थितियां बदतर हुई हैं, कर्मचारियों पर अत्यधिक कार्यभार पड़ा है और औद्योगिक असंतोष बढ़ा है। चतुर्थ श्रेणी में स्थिति विशेष रूप से गंभीर है। कर्मचारी बीमा कानून (संशोधन) अधिनियम 2025 का भी विरोध कर रहे हैं, जिसके तहत बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा 74 प्रतिशत बढ़ाकर 100 प्रतिशत कर दी गई है, जिससे पूर्ण विदेशी स्वामित्व का मार्ग प्रशस्त होता है। यह कदम पॉलिसीधारकों और घरेलू बचतों के हितों को विदेशी एजेंसियों के अधीन करता है तथा देश की दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करता है। इसके अतिरिक्त सरकार की आक्रामक विनिवेश और निजीकरण नीति के खिलाफ भी है। इस हड़ताल को केंद्रीय ट्रेड यूनियनों तथा क्षेत्रीय महासंघों, जिनमें ऑल इंडिया इंश्योरेंस एम्प्लाइज एसोसिएशन का समर्थन प्राप्त रहा।