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लाहौल: बर्फीली वादियों के बीच टेलीस्कोप से तारों को देख फूले नहीं समाए ऊना के विद्यार्थी

जिला लाहौल-स्पीति की वादियां इन दिनों बेहद साफ-सुथरी हो गई हैं। हाल ही में हुई बर्फबारी के बाद घाटी के पहाड़ों ने हल्की सफेद चादर ओढ़ ली है और आसमान साफ है। ऐसे में रात के समय स्टारगेजिंग का नजारा और भी ज्यादा अलौकिक हो जाता है। दावा है कि पूरे भारत में सबसे साफ और अंधेरा आसमान लद्दाख और लाहौल-स्पीति का माना जाता है। यहां लाइट पॉल्यूशन न के बराबर है, इसलिए रात को हजारों तारे और आकाशगंगा एकदम साफ नजर आती है, जबकि शहरों में धुंध के कारण तारे दिखाई भी नहीं देते। केलांग के एमेच्योर एस्ट्रोनॉमर आमची प्रकाश ने 6 माह की प्रोफेशनल स्टारगेजिंग ट्रेनिंग ली है। अब वे पर्यटकों को टेलीस्कोप से अंतरिक्ष दर्शन करवाते हुए इसे एस्ट्रो टूरिज्म का हिस्सा बना रहे हैं। उनका प्रयास है कि जैसे लद्दाख के हानले को डार्क स्काई रिजर्व घोषित किया गया है, वैसे ही लाहौल को भी इस मानचित्र पर लाया जाए। शनिवार रात को केलांग आए रुके ऊना के विद्यार्थियों ने टेलीस्कोप से चांद के गड्ढे, शनि के छल्ले, बृहस्पति और सप्तर्षि मंडल देखा। किताबों में पढ़ी बातों को आंखों से देख छात्र फूले नहीं समाए और बेहद खुश नजर आए। स्थानीय लोगों का कहना है कि आमची प्रकाश जैसे युवाओं के प्रयास से लाहौल दिन में बर्फ के पहाड़ और रात में तारों भरा आसमां दिखा कर साल भर का टूरिस्ट डेस्टिनेशन बन सकता है।

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