जनजातीय क्षेत्र पांगी में सोमवार को पारंपरिक तरीके से जिलास्तरीय ऐतिहासिक फुल यात्रा उत्सव का शुभारंभ हुआ। तीन दिवसीय इस मेले के शुभारंभ मौके पर गुरों ने पारंपरिक तरीके से पूजा-अर्चना कर शुरुआत की। फुल यात्रा मेला ग्रीष्म ऋतु के समापन और सर्दियों के आगमन का प्रतीक माना जाता है। पांगी में फुलयात्रा मेला कब से मनाया जा रहा है, इसके बारे में किसी को अधिक जानकारी नहीं है। ऐसा कहा जाता है कि सदियों से लोग इस मेले को मना रहे हैं। पांगी में पहले आपसी मिलन का एक मात्र साधन मेले और त्योहार ही होते थे। पांगी के लोग फुलयात्रा मेले से पहले अपनी जमींदारी के साथ सर्दियों का खाने का सारा सामान इकट्ठा कर लेते थे। पशुओं के चारे को भी सर्दियों से पहले एकत्रित कर लिया जाता था। सर्दियों में यहां भारी मात्रा में बर्फबारी होती है, इस वजह से लोग घरों में दुबककर रह जाते हैं। भरमौर पांगी विधानसभा क्षेत्र के विधायक डॉक्टर जनक राज ने किलाड़ हेलीपैड में पहुंचकर करयास प्रजा मंडल की ओर मां वालीन माता मंदिर से आने वाले रथ यात्रा का विधिवत रूप से स्वागत किया और रथ यात्रा में शामिल होकर फूलयाटनू मैदान तक पहुंचे। यह मेला तीन दिन तक मनाया जाता है है। मेले में पहले नाै प्रजाएं (लुज, सुराल, धरवास, करयास, कूफा, कवास, हुडान, किरयूनी और किलाड़) फुलयतानु मैदान में इकट्ठा होकर मेला मनाती थी। लेकिन अब कूफा, कवास, किलाड़, करयास की प्रजाएं ही भाग लेती हैं।