देश की आजादी की लड़ाई में अपना सबकुछ न्यौछावर करने वाले और सीमाओं की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले गांव खारवन के तीन महानायकों का इतिहास आज धीरे-धीरे स्मृतियों तक सिमटता जा रहा है। आजाद हिंद फौज के गुरबक्श सिंह और जसवंत सिंह ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व में देश की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया। वहीं, 1971 के भारत-पाक युद्ध में गांव के वीर सपूत जागीर सिंह ने अपने प्राणों की आहुति देकर मातृभूमि का मान बढ़ाया। विडंबना यह है कि जिन महानायकों पर गांव को गर्व होना चाहिए, आज उनके सम्मान में न तो कोई कार्यक्रम होता है। जिले की दूर गांव की ही नई पीढ़ी को उनके नायकों के बारे में कोई जानकारी नहीं है। वहीं, स्वतंत्रता सेनानियों और शहीदों की स्मृति में बना गौरवपट्ट भी अब अनदेखी का शिकार बना हो रहा है।