जिले में मौसम के बदले मिजाज ने किसानों और मंडी आढ़तियों की चिंता बढ़ा दी है। वीरवार को देर रात तक रुक-रुक कर हुई बारिश के बाद शुक्रवार सुबह भी आसमान में घने बादल छाए रहे। बेमौसम बारिश के कारण जिले की विभिन्न अनाज मंडियों में खुले में पड़ा लगभग 5500 मीट्रिक टन धान भीग गया। सबसे अधिक 21 मिलीमीटर बारिश पानीपत तहसील में दर्ज की गई। देर रात तक तेज हवाओं के साथ बारिश का दौर जारी रहा, जिससे मंडियों में जलभराव की स्थिति बन गई। सुखाने के लिए रखा गया धान और बोरियों में बंद फसल दोनों ही पानी की चपेट में आ गए। यहां इतनी बारिश हुई पानीपत: 21 मिमी समालखा: 09 मिमी इसराना: 10 मिमी बापोली: 10 मिमी मतलौडा: 07 मिमी किसान रामफल और कर्म सिंह का कहना है कि धान की कटाई और उठान का काम जोरों पर था, लेकिन अचानक हुई इस बारिश से पूरी व्यवस्था चरमरा गई है। भीगे हुए धान में नमी का स्तर बढ़ने से अब इसके खराब होने और मंडी में उचित दाम न मिलने का खतरा सता रहा है। प्रशासन की ओर से मंडियों में तिरपाल और उठान के पुख्ता इंतजाम का दावा किया गया था, लेकिन अचानक हुई तेज बारिश से ये व्यवस्थाएं अपर्याप्त साबित हुईं। किसान और आढ़ती अब बची हुई फसल को तिरपाल से ढककर बचाने में जुटे हैं। मौसम विभाग ने आगामी 24 घंटों में भी बादल छाए रहने की संभावना जताई है।