संवाद न्यूज एजेंसी नारनौल। करीब दो साल से निर्माणाधीन अस्पताल भवन का बेसमेंट पानी से लबालब भरा हुआ है। लगातार पानी भरे रहने से भवन की नींव कमजोर होने की आशंका बढ़ गई है। हालत यह है कि अस्पताल का भवन तैयार होने से पहले ही उसकी मजबूती पर सवाल खड़े होने लगे हैं। वहीं पिछले करीब दो वर्षों से निर्माण कार्य भी पूरी तरह बंद पड़ा है, जिससे परियोजना अधर में लटक गई है। अस्पताल का निर्माण कार्य करीब पांच साल पहले शुरू हुआ था। जानकारी के अनुसार, भवन निर्माण के दौरान बेसमेंट में पानी भरना शुरू हुआ था, लेकिन समय रहते इसकी निकासी नहीं कराई गई। लगातार पानी जमा रहने से सीमेंट-कंक्रीट और नींव पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक पानी भरा रहने से भवन की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। स्वास्थ्य विभाग भी इस स्थिति को लेकर गंभीर है। विभाग की ओर से लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) को करीब 22 बार पत्र लिखकर बेसमेंट से पानी निकालने और आवश्यक कदम उठाने की मांग की जा चुकी है। इसके बावजूद अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है। निर्माण कार्य बंद होने के कारण अस्पताल भवन अधूरा पड़ा है। अब सरकार ने शेष कार्य पूरा कराने के लिए दोबारा टेंडर जारी किया है। उम्मीद है कि नई एजेंसी के चयन के बाद निर्माण कार्य दोबारा शुरू होगा और लंबे समय से रुकी परियोजना को पूरा किया जा सकेगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र को आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से अस्पताल भवन का निर्माण शुरू किया गया था, लेकिन वर्षों की देरी और लापरवाही के कारण लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। उनका कहना है कि सबसे पहले बेसमेंट से पानी निकालकर भवन की तकनीकी जांच कराई जानी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी प्रकार का खतरा न रहे। वर्जन: निर्माणाधीन दो सौ बेड के अस्पताल का दोबारा कार्य जल्द ही शुरू होगा। इसके लिए टेंडर जारी कर दिया है। वहीं बेसमेंट में बारिश की वजह से पानी भर गया है उसे खाली करवाया जाएगा। जितेंद्र कुमार, एसडीओ पीडब्ल्यूडी नारनौल।