फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नारनौल के संतलाल को गर्मी में सर्दी, सर्दी में गर्मी का अहसास, डॉक्टर भी नहीं जान पाए वजह

नारनौल। गांव डेरोली अहीर के संतलाल जब कंबल ओढ़ना शुरू कर देते हैं तो ग्रामीण समझ जाते हैं कि गर्मियां शुरू होने वाली हैं और कंबल हटाकर जब कम कपड़ों में नजर आने लगे तो समझिए कि सर्दियों की शुरुआत होने वाली हैं। जी हां हम यहां बात कर रहे हैं करीब 70 वर्षीय संतलाल की जिनका शरीर प्रकृति के ठीक उल्टा प्रतिक्रिया दे रहा है। संतलाल अपनी अनोखी शारीरिक स्थिति को लेकर चर्चा में बने हुए हैं। उनको बचपन से ही गर्मियों में सर्दी व सर्दियों में गर्मी का एहसास होता है। इन दिनों जहां आमजन तेज गर्मी से बचने के लिए कूलर, एसी और पंखों का सहारा ले रहे हैं, वहीं संतलाल दो मोटे कंबल ओढ़कर रहते हैं। इतना ही नहीं, ठंड अधिक महसूस होने पर वह अलाव जलाकर उसके सामने भी बैठ जाते हैं। हैरानी की बात यह है कि इस दौरान उसके शरीर पर पसीने की बूंद तक दिखाई नहीं देती। बचपन से ही हैं ऐसे: ग्रामीणों के अनुसार संतलाल को गर्मी के मौसम में ठंड और सर्दियों में गर्मी का एहसास होता है। उनका कहना है कि बचपन से ही उसकी यही स्थिति है। संतलाल का दावा है कि आज तक कोई गंभीर बीमारी नहीं हुई और वह सामान्य जीवन जी रहे हैं। सर्दियों में लेते हैं बर्फ का सहारा: संतलाल बताते हैं कि सर्दियों के मौसम में जब लोग कई परतों वाले गर्म कपड़े पहनते हैं, तब उन्हें गर्मी महसूस होती है। वह बर्फ की सिल्ली पर लेट जाते हैं और सुबह तड़के तालाब में स्नान भी करते हैं। उनका कहना है कि ठंड के मौसम में पानी में रहने से उन्हें राहत मिलती है, जबकि गर्मियों में उन्हें ठंड से बचने के लिए कंबल और अलाव का सहारा लेना पड़ता है। ग्रामीण बुलाते हैं मौसम विभाग: ग्रामीणों का कहना है कि शुरू में लोगों को यह सब अविश्वसनीय लगता था, लेकिन वर्षों से वे संतलाल की दिनचर्या देख रहे हैं। उनका कहना है कि यह किसी प्रकार का दिखावा नहीं, बल्कि वास्तविकता है। गांव में लोग उन्हें मजाक में मौसम विभाग के नाम से भी पुकारते हैं। साइंस भी हो चुकी फेल: संतलाल के अनुसार उनकी इस अनोखी स्थिति को देखने और समझने के लिए कई बार चिकित्सकों की टीमें भी गांव पहुंची थी। उनकी कई स्वास्थ्य जांच भी कराई गईं, लेकिन कोई ऐसी स्पष्ट चिकित्सीय वजह सामने नहीं आई। हालांकि उनकी इस अनोखी अवस्था का वैज्ञानिक कारण तो स्पष्ट नहीं हो पाया है, लेकिन गांव में आने वाले लोगों के लिए संतलाल किसी कौतूहल से कम नहीं हैं।

विज्ञापन

Latest

Recommended

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
AU ऐप में पढ़ें