केवल एक छत के नीचे रहना और खाना ही संयुक्त परिवार नहीं है। बदलते समय के साथ परिवार का स्वरूप और तरीके भी बदल रहे हैं। वर्तमान में तो तकनीकी रूप से दूर रहकर भी संयुक्त परिवार को बनाए रख सकते हैं। वर्तमान परिस्थितियां परिवारों में दूरी बना रही हैं, लेकिन तकनीकी रूप से प्रतिदिन अपनेपन का इजहार करना संयुक्त परिवार को जोड़े रख सकता है। ये बातें हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय से पर्यावरण अध्ययन विभाग व गर्ल्स होस्टल प्रोबोस्ट डॉ. मोना शर्मा ने कही। अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से शहर स्थित राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में शुक्रवार को अपराजिता कार्यक्रम आयोजित किया गया। अंतरराष्ट्रीय परिवार दिवसीय पर आयोजित इस कार्यक्रम की थीम बदलती मानसिकता से टूटते संयुक्त परिवार रही। इसमें बतौर मुख्य वक्ता हकेंवि से पर्यावरण अध्ययन विभाग व गर्ल्स होस्टल प्रोबोस्ट डॉ. मोना शर्मा, विशिष्ट वक्ता अधिवक्ता रेखा यादव, अधिवक्ता बबली और फैमिली कोर्ट काउंसलर पिंकी यादव ने शिरकत की। इसके साथ शिक्षिका डॉ. शिव भावना और प्राचार्य सुनील गोरा ने भी छात्राओं को लोगों की बदलती मानसिकता के कारण टूटते संयुक्त परिवारों पर व्याख्यान दिया। साथ ही छात्राओं ने भी परिवारों की समस्या पर सवाल पूछे। मातृभाषा को छोड़ पाश्चात्य संस्कृति अपनाना ही परिवार टूटने का मुख्य कारण फिलहाल समाज में मातृ भाषा यानी हिंदी बोलने वाले को लोग मूर्ख समझते हैं और अंग्रेजी वक्ता को जेंटलमेन। लेकिन हमारा सोचने व बोलने का काम हिंदी में होता है। परिवार में भी आपसी बातचीत इसी कारण से बंद हो गई है। अगर मूल भाषा में कार्य हो तो हम भी जापान, जर्मनी, अमेरिका, रूस की तरह विकसित हो सकते हैं। ये देश अपनी मातृभाषा यानी अपनी जड़ों से जुडे़ हुए हैं और इसलिए प्रतिदिन विकास कर रहे हैं। - पिंकी यादव, काउंसलर, फैमिली कोर्ट स्कूली शिक्षा केवल किताबों तक सिमटी, बच्चों से गायब हुए संस्कार: वर्तमान की स्कूली शिक्षा केवल किताबों तक सिमट गई है और बच्चों से संस्कार गायब हो गए हैं। पहले बच्चों को गुरुकुल में विद्या और संस्कार दिए जाते और इसके कारण परिवार संगठित रहता था। अंग्रेजों ने गुरुकुल शिक्षा समाप्त की और संयुक्त परिवार भी खत्म हो गए। आजकल बच्चों में दोस्ती, एकल परिवार, सोशल मीडिया, प्रेम विवाह के कारण संस्कार और संस्कारों के अभाव में संयुक्त परिवार खत्म हो गए हैं। संयुक्त परिवार बनाए रखने के लिए संस्कारयुक्त शिक्षा देनी होगी। - अधिवक्ता रेखा यादव, फैमिली कोर्ट छात्राओं के सवाल: उर्मिला- सुयक्त परिवार में महिलाओं को तंग किया जाता है? डॉ. मोना का जवाब: संयुक्त परिवार में महिलाओं को तंग नहीं किया जाता है। नारी सहनशील है और वही परिवार को जोड़े रखने की कड़ी होती है। धैर्य रखना चाहिए और बातों पर बैठकर विमर्श करना चाहिए। बड़ाें की बातें माननी चाहिए। नेहा- नारी स्वावलंबी है तो वहीं सभी का ध्यान क्यों रखे? अधिवक्ता रेखा का जवाब- नारी स्वावलंबी है और आजकल नारियों को इसका भ्रम हो चुका है। महान कार्य करने पर गर्व करना अच्छी बात है, लेकिन कभी परिवार नहीं तोड़ना चाहिए। झांसी की रानी भी महान योद्धा रही, लेकिन उन्होंने कभी घर को नजरअंदाज नहीं किया।