पढ़ने में की उम्र में कुछ बच्चे बड़ों जैसा काम कर देते हैं। ऐसा ही काम हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के इलेक्ट्रीकल एंड इंजीनियरिंग विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. कल्पना चौहान के बेटे शौर्य चौहान ने 12 साल की उम्र में किया है। उन्होंने बारिश व ओस के दौरान क्रिकेट खेल मैदान को सुखाने के लिए एक ब्लोअर ड्रोन का डिजाइन तैयार किया है। खास बात यह है कि इसमें रिमोट और ऑटोमेटिक ऑपरेटिंग सिस्टम है। शौर्य चौहान ने बताया कि वे आठवीं कक्षा में पढ़ रहे हैं और प्रतिदिन खेलने के लिए गांव पाली स्थित एक अकादमी में अभ्यास करने जाते थे। गत वर्ष ही सर्दियों में सुबह ओस के कारण मैदान गीला मिलता और फिर मोटी रस्सी को मैदान में फिराकर सुखना पड़ता था। तभी उनके दिमाग में डिवाइस तैयार करने का विचार आया जो मिनटों में मैदान को सूखा दे। फिर उन्होंने सर्च किया तो भवन सुखाने व सफाई के लिए ड्रोन तकनीक मिली। इसके बाद उन्होंने विचार निकाला और डॉ. कल्पना चौहान के साथ साझा किया। उन्होंने बताया कि अभी तक खेल मैदान सुखाने के लिए कोई ड्रोन नहीं बना है और अन्य ड्रोन के मुकाबले भी अलग है। इस डिजाइन को बनाने में उन्हें एक साल का समय लगा और अब छह माह बाद उनको यह पेटेंट मिला है। हालांकि शौर्य की उम्र कम होने के कारण पेटेंट में उनकी माता डॉ. कल्पना चौहान व पिता डॉ. राजीव चौहान का नाम भी शामिल किया गया। डिजाइन बनाने में डॉ. कल्पना ने सामान की क्वालिटी और ड्रोन के संतुलन बनाने में मदद की है। बचपन से ही वैज्ञानिक उपकरणों को देखने का शौक डॉ. कल्पना ने बताया शौर्य को बचपन से ही वैज्ञानिक उपकरण देखने का शौक है और इसके चलते वह उनके साथ प्रयोगशालाओं में जाता है। पहले भी अमेरिका, सिंगापुर की प्रयोगशाला में भ्रमण कर चुका है और इसके साथ ही दुबई में आयोजित सेमिनार में भी डिजाइन की प्रजेंटेशन दी है। इनके साथ ही दैनिक उपयोग के डिवाइस भी बना चुका है, लेकिन यह शौर्य का पहला पेटेंट और बड़ा डिवाइस डिजाइन है। कैसे काम करेगा ड्रोन ड्रोन का संतुलन बनाने के लिए ऊपर 6 पंखुड़ियां लगी हैं जबकि नीचे स्टैंड और ब्लोअर लगा है। इसमें किसी प्रकार का पानी या रसायन डालने की जरूरत नहीं है। हाई पावर चार्जेबल बैटरी भी फिट की गई है। यह 15 से 20 मिनट में 7500 वर्ग मीटर एरिया को सुखा देगा। खास बात यह है कि यह एआई से ऑटोमेटिक ऑपरेट होगा और टाइमर पूरा होने पर वापस अपने स्थान आ जाएगा। बैटरी लॉ होने से पहले बैकअप रखकर यह अपने स्थान पर आ जाएगा। इसको रिमोट और फोन दोनों से कंट्रोल किया जा सकता है। इसमें मानव हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है। व्यवसायिक रूप से देने कंपनी से बातचीत जारी इस ड्रोन को व्यवसायिक रूप देने के लिए शौर्य ने भारतीय सेना के लिए और सामान्य ड्रोन बनाने वाली कंपनियों से बातचीत की है। अगर कंपनी के साथ होने वाली बैठक में सहमति बनती है तो इसको व्यवसायिक रूप दिया जाएगा। इसमें मुख्य रूप से ड्रोन में हल्का हेक्साकॉप्टर फ्रेम, केंद्रीय सेंट्रीफ्यूगल ब्लोअर, समान रूप से सफाई के लिए समायोज्य नोजल, जीपीएस आधारित स्वचालित नेविगेशन और कैमरा सेंसर लगाए गए हैं।