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कुरुक्षेत्र: महर्षि दयानंद सरस्वती जयंती पर तीन हजार युवाओं ने एक साथ किया सूर्य नमस्कार

महर्षि दयानंद सरस्वती की जयंती के अवसर पर गीता निकेतन विद्यालय के खेल मैदान में राज्य स्तरीय सूर्य नमस्कार कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। इस विशेष कार्यक्रम में योग गुरु स्वामी रामदेव ने शिरकत कर युवाओं को योग और भारतीय संस्कृति का महत्व बताया। कार्यक्रम का शुभारंभ के बाद स्वामी रामदेव ने ग्राउंड परिसर में पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया गया। कार्यक्रम में करीब 3000 युवाओं ने एक साथ सूर्य नमस्कार कर योग के प्रति अपनी आस्था प्रकट की। स्वामी रामदेव ने कहा कि भले ही हम साधारण परिवार में जन्मे हों, लेकिन ज्ञान, योग और चरित्र के बल पर हम सभी अत्यंत समृद्ध बन सकते हैं। युवाओं से बड़ी सोच रखने और कठोर परिश्रम करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए, तब तक रुकना नहीं चाहिए। योग गुरु ने कहा कि महर्षि दयानंद सरस्वती ने देश को वेदों की ओर लौटने का संदेश दिया। वेद हमारी संस्कृति की आत्मा हैं और सनातन धर्म का मूल आधार भी। हमारे दिन की शुरुआत योग से होनी चाहिए। स्वामी रामदेव ने सूर्य नमस्कार को शरीर और मन दोनों के लिए ऊर्जादायक बताया और युवाओं से प्रतिदिन भस्त्रिका, कपालभाति, अनुलोम-विलोम, भ्रामरी और सूर्य नमस्कार करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इससे शरीर फौलादी और मस्तिष्क तेजस्वी बनता है। गीता योग शास्त्र है और इस धरती पर सूर्य नमस्कार होना किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं है। उन्होंने कहा कि योग करने युवाओं में स्वामी रामदेव, महर्षि दयानंद, स्वामी विवेकानंद की आत्मा और ऋषियों की चेतना देखता हूं। इस मौके पर आयुष, शिक्षा, खेल, स्वास्थ्य, पुलिस व अन्य विभागों के सदस्य मौजूद रहे।

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