कुरुक्षेत्र। विभिन्न मांगों को लेकर बिजली निगम के कर्मचारी और अधिकारी बुधवार को सड़कों पर उतर आए। लाइनमैन से लेकर अभियंता तक बड़ी संख्या में कर्मचारियों व अधिकारियों ने बिजली भवन से रोष मार्च निकालकर जिला सचिवालय पहुंचकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी करीब साढ़े 12 बजे करीब साढ़े तीन घंटे तक उपायुक्त को ज्ञापन देने की मांग पर अड़े रहे। इस दौरान उन्होंने डीसी कार्यालय का घेराव किया और लगातार स्यापा कर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। कर्मचारियों के गुस्से को देख भारी पुलिस बल भी तैनात रहा। हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त संघर्ष मोर्चा की ओर से सड़क पर उतरे प्रदर्शनकारी कर्मचारी नेताओं का कहना था कि जब तक उपायुक्त स्वयं आकर उनका ज्ञापन स्वीकार नहीं करेंगे, तब तक वे वहां से नहीं हटेंगे। काफी देर तक अधिकारियों के स्तर पर ज्ञापन लेने का प्रयास किया गया, लेकिन कर्मचारियों ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया। स्थिति उस समय और तनावपूर्ण हो गई, जब प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उपायुक्त स्वयं ज्ञापन लेने नहीं पहुंचे तो वे जबरदस्ती सचिवालय भवन में प्रवेश करेंगे। साथ ही सचिवालय की बिजली आपूर्ति काटने का भी अल्टीमेटम दिया। इसके बाद प्रशासन हरकत में आया और करीब 15 मिनट बाद करीब सवा चार बजे उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा ने स्वयं बाहर पहुंचकर कर्मचारियों का ज्ञापन लिया। इसके बाद प्रदर्शन शांतिपूर्वक समाप्त हुआ। हालांकि इससे पहले प्रदर्शन कर रहे कर्मियों को बताया गया कि जिला उपायुक्त मीटिंग व अन्य कार्य के चलते व्यस्त है लेकिन कर्मचारी उन्हें ही मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपने पर अड़े रहे। रोष प्रदर्शन के दौरान कर्मचारी नेताओं ने सरकार और निगम प्रबंधन पर कर्मचारियों की लंबे समय से लंबित मांगों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कई बार मांगों को लेकर ज्ञापन और बातचीत की जा चुकी है, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकला। इसी के विरोध में अब आंदोलन तेज किया जा रहा है। धरने की अध्यक्षता करते हुए कुरुक्षेत्र सर्कल सचिव कृष्ण चौहान, मंच संचालन कर रहे रणजीत सिंह ने ऐलान किया कि यदि उनकी मांगों का जल्द समाधान नहीं किया गया तो 11, 12 और 13 अगस्त को बिजली निगम के कर्मचारी और अधिकारी संपूर्ण हड़ताल पर रहेंगे। उन्होंने कहा कि आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और निगम प्रबंधन की होगी। रोष प्रदर्शन में एसई मदन गोपाल जिंदल, एक्साईएन मेहताब सिंह व हिंमाशु पवार के अलावा एसडीओ व अन्य स्तर के अधिकारी व कर्मचारी शामिल रहे। ये रही मुख्य मांगें - बिजली क्षेत्र में निजीकरण की प्रक्रिया निरस्त की जाए। - डिस्काम योजना को रद्द किया जाए। - गुरुग्राम व नूह में बिजली वितरण का निजीकरण बंद किया जाए। - एक्सग्रेशिया पॉलिसी 2019 में संशोधन, ऑनलाइन तबादला पॉलिसी रद हो। - पुरानी पेंशन बहाल की जाए, कच्चे कर्मचारियों को नियमित किया जाए। - आरक्षण नीति लागू की जाए, कैशलैस मेडिकल सुविधा दी जाए।