संवाद न्यूज एजेंसी बेरी। गांव दूबलधन स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में आपातकालीन सेवा न होने पर नाराज ग्रामीणों ने सोमवार को जिला पार्षद के नेतृत्व में अस्पताल परिसर के बाहर धरना देकर स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ नारेबाजी की। धरने पर बैठे ग्रामीणों का कहना था कि रात में आपात स्थिति में मरीजों को चिकित्सकीय सुविधा नहीं मिलती, जिससे उन्हें गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ता है। रात के समय सीएचसी में कोई मरीज आता है तो उसको बेरी अस्पताल में जाने के लिए भेज देते हैं। जिला पार्षद प्रतिनिधि कृष्ण उर्फ फोर्ड, रविंद्र कौशिक, भाकियू जिला अध्यक्ष ममता कादयान, तेजबीर बाघपुर, सरपंच जगपाल बिध्यान, ब्लॉक समिति चेयरमैन प्रतिनिधि प्रशांत, पंच अजीत, जितेंद्र, सरपंच प्रतिनिधि नीरज, गौरव, जयभगवान, सूरजभान ने बताया कि दूबलधन और आसपास के दर्जनों गांवों की बड़ी आबादी इस सीएचसी पर निर्भर है, लेकिन स्वास्थ्य केंद्र पर सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। रात के समय चिकित्सक की अनुपस्थिति के कारण दुर्घटना, प्रसव अथवा अन्य गंभीर मामलों में मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिल पाता। इससे मरीजों की जान तक जोखिम में पड़ जाती है। धरने के दौरान ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से तत्काल समाधान की मांग की। धरने पर बैठे ग्रामीणों की प्रमुख मांग थी कि सीएचसी को पीजीआई स्तर की स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ा जाए ताकि विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके। साथ ही अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मशीन स्थापित करने, आवश्यक चिकित्सा उपकरण उपलब्ध कराने, डॉक्टरों और स्टाफ की पर्याप्त नियुक्ति करने की भी मांग उठाई गई। सूचना मिलने पर स्वास्थ्य विभाग झज्जर से उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. कुलदीप मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों से बातचीत की। ग्रामीणों से बातचीत के बाद लिखित में जल्द से सीएचसी में आपातकालीन सेवाएं शुरू करने आश्वासन दिया गया। लिखित आश्वासन मिलने के बाद जिला पार्षद और ग्रामीणों ने धरना समाप्त करने की घोषणा की। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि तय समय में मांगों पर अमल नहीं हुआ तो भविष्य में बड़ा आंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की होगी।