नेशनल रिसर्च सेंटर ऑन कैमल बीकानेर के निदेशक डॉ. ए के पुनिया ने कहा कि डायबिटीज, ऑटिज्म, एलर्जी सहित कई बीमारियों में ऊंटनी का दूध सबसे कारगर साबित हो रहा है। ऊंटनी के दूध को सुपर फूड के रूप में देखा जा रहा है। हम इसे डेजर्ट डेयरी प्रोडेक्ट के तौर पर विकसित कर रहे हैं। हम इसे राजस्थान तक सीमित नहीं रखेंगे,देश के कई हिस्सों से इसकी मांग आ रही है। कई संस्थानों ने भी हमसे संपर्क कर ऊंटनी के दूध तथा उससे तैयार उत्पादों की मांग की है। अगर यहां के संस्थान तैयार होंगे तो हरियाणा में भी हम इसे उपलब्ध कराएंगे। लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय में एक कार्यक्रम में पहुंचे एनआरसीसी निदेशक डॉ. के पुनिया ने कहा कि ऊंटनी के दूध काे लेकर हमारे संस्थान में काफी रिसर्च हुए हैं। अमर उजाला से खास बातचीत में उन्होंने बताया कि ऊंट की 9 प्रजातियों में 5 प्रजाति पर एनआरसीसी में काम हो रहा है। हम कुछ चिकित्सा संस्थानों के साथ मिल कर शोध कर रहे हैं। कई शोध में हमारे सामने आया है कि ऊंटनी के दूध में न सिर्फ पोषण भरपूर होता है, बल्कि इसमें कई ऐसे तत्व हैं जो शरीर के लिए बेहद उपयोगी हैं। इस दूध में फैट की मात्रा 3.5 से 5 प्रतिशत के बीच होती है। गाय -भैंस के दूध की तुलना में फैट मात्रा काफी कम है। इसमें नेचुरल इंसुलिन की मात्रा एक सीमित मात्रा तक होना इसे डायबिटीज मरीजों के लिए खास बनाती है। इसमें मौजूद प्रोटीन और एंटीऑक्सीडेंट तत्व शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करते हैं। खास तौर पर ऊंटनी का दूध टाइप-1 डायबिटीज, ऑटिज्म और एलर्जी में उपयोगी साबित हुआ है। इसमें मौजूद इंसुलिन -प्रोटीन शरीर में शुगर लेवल को नियंत्रित करने में मदद करती है। एनआरसीसी में ऊंटनी के दूध से कई स्वादिष्ट डेयरी उत्पाद भी बनाए जा रहे हैं। जिसमें फ्लेवर्ड मिल्क, पनीर, कुल्फी, मावा, गुलाब जामुन, रसगुल्ला, पेड़ा और दूध पाउडर प्रोडक्ट तैयार कर रहे हैं।देश भर से इन उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है। हम डेजर्ट डेयरी प्रोडक्ट के तौर पर इसे विकसित कर रहे हैं। कुछ स्थानों पर हम इसे उपलब्ध करा रहे हैं। कोल्ड चेन सिस्टम के जरिए दूसरे राज्यों तक हम इन उत्पादों को पहुंचा रहे हैं। बिना पाश्चुरीकृत किसी भी दूध का पीना संक्रमण का खतरा बन सकता है। प्रोसेस्ड दूध का ही उपयोग करना चाहिए। बहु उपयोगी बनाएंगे इसके बाल, हड्डी का भी उपयोग डॉ. एके पुनिया ने कहा कि ऊंट को केवल दूध तक सीमित नहीं किया जा सकता। इसके बहु उपयोगी बनाने के लिए उसे इको टूरिज्म के साथ जोड़ रहे हैं। राजस्थान के एरिया में ऊंट की सवारी काफी प्रचलित हो रही है। ऊंट के बाल तथा उसकी हड्डियों का भी सदुपयोग किया जा सकता है। ट्रांसपोर्ट के नए साधन आने से ऊंट की संख्या में कुछ कमी आई है। हमें उम्मीद है कि आने वाले समय में केंद्र व प्रदेश सरकार की योजनाओं के चलते इनकी संख्या बढ़ेंगी। ऊंटनी का दूध नमकीन, कीड़े होने का मिथक लोगों में एक अवधारणा है कि ऊंटनी का दूध काफी नमकीन होता है। ऐसा कुछ नहीं है ,यह दूध भी गाय- भैंस के दूध के समान ही है। लोगों में भ्रांति है कि ऊंटनी का दूध बहुत जल्द खराब हो जाता है। हकीकत यह है कि यह दूध भी दूसरे दूध की तरह से ही उपयोग किया जा सकता है। इसकी सेल लाइफ भी उनके बराबर है। एक बड़ी भ्रांति यह भी है कि ऊंटनी के दूध में कीड़े होते हैं। यह पूरी तरह से गलत है।