जिला बार एसोसिएशन की ओर से आयोजित अभिनंदन समारोह में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत पहुंचे। अभिनंदन समारोह के बाद जस्टिस सूर्यकांत ने पुराने दिनों को याद करते हुए उस हॉल में पहुंचे ,जहां से उन्होंने अधिवक्ता के तौर पर प्रैक्टिस शुरु की। उस सीट को देखने गए, जहां बैठकर उन्होंने अपने वकालती जीवन की शुरुआत की थी। उनके साथ हाईकोर्ट के जस्टिस, जिला न्यायालय के न्यायाधीश, उनके पुराने साथी अधिवक्ता और बार एसोसिएशन के पदाधिकारी मौजूद रहे। सीजेआई सूर्यकांत ने मंच से संबोधित करते हुए उन्होंने अपने वरिष्ठ अधिवक्ता के मुंशी को याद किया। जिन्होंने उन्हें शुरुआती दिनों में तलवाना भरना सिखाया था। सीजेआई के आमंत्रण पर मुंशी रहे प्रदीप भाटिया को जिला बार एसोसिएशन ने खास तौर पर समारोह में बुलाया। उन्हें वकीलों के बीच बिठाकर सम्मानित किया गया। अभिनंदन समारोह के बाद जस्टिस सूर्यकांत अधिवक्ताओं से बातचीत की। बार एसोसिशन के प्रधान संदीप बूरा तथा वरिष्ठ अधिवक्ता पीके संधीर ने सीजेआई सूर्यकांत को स्मृति चिन्ह भेंट किया। लाल बहादुर खोवाल ने सीजेआई को बताई पुरानी कुर्सी.. सीजेआई सूर्यकांत जब हाॅल में पहुंचे तो अपनी बैंच को नहीं पहचान सके। दरअसल उस समय हॉल में मेज व कुर्सी होती थी।करीब 40 साल में हॉल में वकीलों की सीटिंग प्लान बदल चुकी है। टेबल -चेयर भी बदल चुकी है। एडवोकेट लाल बहादुर खोवाल ने सीजेआई को बताया कि यहां पर एडवोकेट आत्माराम बंसल की कुर्सी होती थी। यहां पर लगी कुर्सी पर आप बैठते थे। इसके बाद सीजेआई ने कुछ वकीलों के नाम लेकर बताया कि यहां पर कौन कौन वकील उनके पास बैठते थे। सीजेआई सूर्यकांत ने मंच से एडवाेकेट देव राज संधीर, आत्माराम बंसल, एमएस नैन,श्याम लाल सरदाना, महाबीर प्रसाद जैन,पंडित जगत स्वरूप, बलदेव सिंह ,जेपी जैन, आनंद कुमार,सुखदेव अग्रवाल, सहित कई अधिवक्ताओं को याद किया।