दादरी की पुरानी अनाज मंडी स्थित केंद्र पर लगातार तीसरे दिन भी डीएपी खाद की खेप नहीं पहुंची। खाद कब तक आएगी, फिलहाल, इसकी जानकारी स्थानीय अधिकारियों के पास भी नहीं है। डीएपी नहीं पहुंचने के कारण शुक्रवार को लगातार तीसरे दिन किसानों को बैरंग लौटना पड़ा। किसानों ने खाद की किल्लत पर रोष जाहिर किया। सरसों के साथ गेहूं की बिजाई शुरू हो चुकी है। इस समय किसानों को डीएपी खाद की जरूरत है, लेकिन, उन्हें मुहैया नहीं हो पा रही है। किल्लत का आलम यह है कि पिछले तीन दिनों से जिले में डीएपी की खेप नहीं आई है। इससे वितरण नहीं हो पा रहा है। खाद वितरण केंद्रों पर स्टॉक न होने की सूचना चस्पा की गई है। इसे पढ़कर किसान लौट रहे हैं। शुक्रवार को पुरानी अनाज मंडी स्थित खाद वितरण केंद्र पर पहुंचे किसान हरेंद्र, सुनील, कुलदीप, मोहन, रामनिवास और रणधीर ने बताया कि गांव से प्रतिदिन खाद लेने के लिए शहर आते हैं, लेकिन, वितरण केंद्र पर स्टॉक न होने की सूचना पढ़कर लौट जाते हैं। शुक्रवार को लगातार तीसरे दिन ऐसा हुआ। किसानों ने कहा कि गांव से दादरी आने में किराये लगता है जबकि समय भी बर्बाद होता है। प्रशासन व सरकार को खाद की किल्लत दूर करानी चाहिए। अब तक पहुंचे हैं 70 हजार बैग जिले में 67 हजार किसान हैं। इस बार जिले में करीब एक लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सरसों व गेहूं की बिजाई होने का अनुमान है। कई किसानों काे डीएपी न मिलने से बिजाई का कार्य रुका हुआ है। अब तक 70 हजार खाद के बैग पहुंचे हैं, जिनका वितरण किया जा चुका है। अब भी करीब 2.20 लाख बैग की जरूरत है। किसान बोले : काटने पड़ रहे चक्कर, फिर भी नहीं मिल रही खाद खाद लेने के लिए कई बार पुरानी अनाज मंडी स्थित खाद-बीज बिक्री केंद्र का चक्कर लगा चुका हूं, लेकिन, डीएपी का एक भी बैग नहीं मिल पाया है। फसल की बिजाई के लिए 4 बैग की जरूरत है, लेकिन, वितरण केंद्र पर खाद का स्टॉक न होने की सूचना ही पढ़ने काे मिल रही है। -रोहताश फोगाट, किसान खाद लेने के लिए 5-6 बार वितरण केंद्र पर चक्कर लगा चुका हूं, लेकिन, हर बार यहां लगे बोर्ड पर खाद नहीं होने की सूचना पढ़कर लौट जाता हूं। शुक्रवार को भी ऐसा ही हुआ। बिना खाद के ही आज भी खाली हाथ घर लौटना पड़ रहा है। वहीं, बिजाई में देरी हो रही है। -रमेश कुमार, गांव मौड़ी हमने 20 हजार खाद के बैग की मांग भेजी हुई है। हमारे पास जितनी भी खाद आती है, हम उसका वितरण कर देते हैं। खाद आने पर बचे हुए किसानों को बांट दी जाएगी। -राजेश कुमार, सहायक मैनेजर, हैफेड़्