शिक्षा का मंदिर कहे जाने वाले स्कूल आजकल बरसाती पानी का गढ़ बन चुके हैं। इसके कारण मंदिरों व चौपालों में बच्चों को ककहरा सिखाने पड़ रहे है। सरकारी स्कूलों के ये हालात पिछले एक सप्ताह से बने हुए हैं। स्कूल में जमा चार फीट बरसाती पानी की निकासी की भी कोई व्यवस्था नहीं है। वहीं चौपालों व मंदिरों में जगह न मिलने पर स्कूलों की छुट्टियां भी करनी पड़ती हैं। दरअसल, जिला मुख्यालय से लगभग 14 किलोमीटर दूर स्थित गांव बीरण के राजकीय प्राइमरी स्कूल व राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल में पिछले एक सप्ताह से लगभग दो फीट तक बरसाती पानी जमा है। जिसके कारण गांव के बाबा बुढ़ा मंदिर में सीनियर सेकेंडरी स्कूल की कक्षाएं लग रही है। वहीं गांव की अनुसूचित जाति की चौपाल में प्राइमरी स्कूल की कक्षाएं संचालित की जा रही है। वहीं गांव का राजकीय उच्च विद्यालय का भवन खस्ताहाल होने के कारण कुछ वर्ष पहले कंडम घोषित करके बंद कर दिया था। इस स्कूल के विद्यार्थियों की कक्षाएं अब राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल में लगाई जा रही है। लेकिन अब इस स्कूल में पानी जमा होने के कारण सीनियर सेकेंडरी स्कूल की कक्षाएं यहां से भी बदलकर गांव के बाबा बुढ़ा मंदिर में संचालित की जा रही है।