तीन माह बाद भी दांग खुर्द के जलघर से जलभराव के निशान नहीं मिटे हैं, ऐसे में जलघर के फिल्टर टैंक और बूस्टर टैंक के अंदर भी जलभराव के बाद की गंदगी अंटी पड़ी है। जिसके अंदर बदबूदार व गंदा पानी जमा है। यही पानी पेयजल आपूर्ति में पूरे गांव के घर-घर तक पहुंच रहा है। जिसे पीना तो दूर नल खोलने भर से बीमारियों के संक्रमण का अंदेशा बना है। ग्रामीण भी पानी के टैंकरों से अपनी प्यास बुझा रहे हैं। सबसे अहम बात तो यह है कि जलघर की मशीनें भी जलभराव में डूबने के बाद मिट्टी और कंचरे के बीच धंसी हैं, जिन्हें चलाया तो जा रहा है लेकिन उनका ठीक से रखरखाव नहीं हो पा रहा है। ऐसे में ये मशीनें भी कभी भी जाम हो सकती हैं। बरसाती जलभराव में गांव दांग खुर्द के जलघर के अंदर तीन से चार फीट तक बरसाती पानी जमा हो गया था। जलघर के टैंक और जलभराव के पानी का एक लेवल हो गया था। यह भी बता पाना मुश्किल हो रहा था कि जलघर के अंदर बने जलभराव में पानी के टैंक कहां पर है। ऐसे हालातों में महीनों बीत गए। अब पानी का स्तर कुछ कम हुआ है, लेकिन तीन माह बाद भी जलघर से बरसाती जलभराव के निशान पूरी तरह से नहीं मिटे हैं। जिसकी वजह से बूस्टर के टैंक के अंदर गंदा पानी जमा है और फिल्टर टैंक में भी काई और गंदगी जमा है। जिसकी सफाई कराना तक जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग ने जरूरी नहीं समझा है।