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दिल्ली: काहे करे श्रृंगार सजनिया, जगतों पे जाए वार सजनिया... सुर मल्हार में रागों से सजी सुरमयी संध्या

सुरों की साधना जब मंच पर उतरती है तो संगीत केवल प्रस्तुति नहीं रहता, वह श्रोताओं के भीतर देर तक गूंजने वाला अनुभव बन जाता है। कुछ ऐसा ही नजारा शनिवार को इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में देखने को मिला। मां सरस्वती की वंदना से शुरू हुआ सुरों का सफर जब राग मालकौंस और ऋतु बसंत के रंगों से गुजरा तो संगीत में प्रकृति की आहट सुनाई दी, और आगे शृंगार की प्रस्तुति ने उसी सुरमयी शाम को भावनाओं के एक अलग रंग से भर दिया। सुर मल्हार इंस्टीट्यूट ऑफ कथक एंड वोकल म्यूजिक के 17वें वार्षिक वोकल रेसिटल ‘निनाद’ में विद्यार्थियों ने शास्त्रीय संगीत की विविध छवियां पेश कीं। कार्यक्रम की शुरुआत ‘सरस्वती वंदना’ से हुई, जिसे मिराया, सार्या, अविका, आयाांशी, इनाया और निमरत ने राग दरबारी कान्हड़ा में प्रस्तुत किया। गंभीर और भावपूर्ण स्वरों में सजी इस प्रस्तुति ने समारोह की सांगीतिक भूमिका तैयार की। कार्यक्रम को प्रख्यात गायिका और संगीतकार सुश्री विधि शर्मा ने दीप प्रज्वलित कर आगे बढ़ाया।

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