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नोएडा: यमुना हुई मैली, सात दिन में 27 फीसदी बढ़ा बीओडी; तिलवाड़ा के पास पानी से आ रही दुर्गंध

Fri, 30 Oct 2026 12:16 PM IST
Vijay Singh Pundir ऋषभ कौशल, अमर उजाला, नोएडा

छठ पूजा से पहले यमुना के पानी की गुणवत्ता चिंता बढ़ा रही है। तिलवाड़ा गांव के पास नदी के पानी का रंग हल्का काला दिखाई दे रहा है और उससे दुर्गंध भी आ रही है। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) की उपलब्ध जांच रिपोर्ट के अनुसार, 21 से 28 सितंबर के बीच एक सप्ताह में पानी में जैविक प्रदूषण का संकेत देने वाला बीओडी स्तर 14.2 से बढ़कर 18 मिलीग्राम प्रति लीटर हो गया। वहीं, सीओडी 73.6 से बढ़कर 84.8 मिलीग्राम प्रति लीटर पहुंच गई।

यूपीपीसीबी के आंकड़ों के अनुसार, तिलवाड़ा के पास एक सप्ताह में बीओडी में करीब 27 फीसदी और सीओडी में लगभग 15 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। पानी में निलंबित ठोस पदार्थों (टीएसएस) की मात्रा भी 114 से बढ़कर 126 मिलीग्राम प्रति लीटर हो गई। वहीं, पानी का गंदलापन मापने वाला टर्बिडिटी स्तर 27 से बढ़कर 29 एनटीयू दर्ज किया गया। दूसरी ओर, तिलवाड़ा के पास पानी में घुलित ऑक्सीजन का स्तर 21 सितंबर को 1.7 मिलीग्राम प्रति लीटर था, जो 28 सितंबर को बढ़कर 2.2 मिलीग्राम प्रति लीटर हो गया। यानी इसमें 0.5 मिलीग्राम प्रति लीटर का सुधार हुआ। इसके बावजूद ऑक्सीजन का स्तर कम बना हुआ है। पानी में ऑक्सीजन की कमी मछलियों और दूसरे जलीय जीवों के लिए प्रतिकूल स्थिति पैदा कर सकती है।

ओखला बैराज के पास भी एक सप्ताह में पानी की गुणवत्ता खराब होने के संकेत मिले हैं। यहां बीओडी 12 से बढ़कर 15 मिलीग्राम प्रति लीटर और सीओडी 60 से बढ़कर 76 मिलीग्राम प्रति लीटर हो गई। यानी बीओडी में 25 फीसदी और सीओडी में करीब 27 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। वहीं, टीएसएस का स्तर 99 से बढ़कर 104 मिलीग्राम प्रति लीटर पहुंच गया। इसके अलावा, ओखला बैराज के पास घुलित ऑक्सीजन का स्तर 4.1 से घटकर 3.7 मिलीग्राम प्रति लीटर रह गया। दोनों स्थानों के आंकड़े बताते हैं कि एक सप्ताह में प्रदूषण के कई मानकों में बढ़ोतरी हुई है, जबकि ओखला बैराज के पास घुलित ऑक्सीजन में गिरावट दर्ज की गई है।

पिछले साल ज्यादा खराब थी हालत, अब कुछ सुधार
यूपीपीसीबी की अक्तूबर 2025 की उपलब्ध रिपोर्ट में सेक्टर-11 के पास 6 अक्तूबर को बीओडी 70 और सीओडी 348 मिलीग्राम प्रति लीटर दर्ज की गई थी। 27 अक्तूबर को बीओडी 72 और सीओडी 336 मिलीग्राम प्रति लीटर रही। इस अवधि में बीओडी में करीब 2.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि सीओडी में लगभग 3.4 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। टीएसएस भी 180 से घटकर 164 मिलीग्राम प्रति लीटर रह गया।

ज्यादा देर पानी में रहे तो बढ़ सकती हैं त्वचा संबंधी बीमारियां
जिला अस्पताल के त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ अभिषेक दुबे ने बताया कि यमुना नदी का प्रदूषण अभी बढ़ा हुआ है। यदि कोई यमुना के जल में पांच मिनट या उससे ज्यादा देर रहता है तो उन्हें त्वचा संबंधी बीमारियां हो सकती हैं। जैसे कि शरीर में जलन, खुजली, चकत्ते या एलर्जी जैसी दिक्कतें आ सकती हैं। यहां तक की जिसकी त्वचा ज्यादा नरम होगी, उसे त्वचा का ज्यादा संक्रमण हो सकता है।
छठ नजदीक, आयोजक बोले-हर साल मिलती है खामियां

हम पिछले 22 साल से छठ कालिंदी कुंज घाट में मनाते आ रहे हैं, लेकिन पिछले पांच साल से प्रदूषित मिली है, हर बार साफ के वादे करते हैं, लेकिन गंदे पानी के बीच में ही अर्घ्य देना पड़ता है, बहुत दुर्गंध भी आती है-सुजीत कुमार केसरी, अध्यक्ष, छठ पूजा सेवा समिति

हर साल जब छठ की तैयारी होती है तो हमें प्राधिकरण की ओर से अच्छा सहयोग नहीं मिलता है, जिसके चलते घाट की गंदगी समय रहते साफ नहीं होती है, छठ शुरू हो जाता है, तब तक सफाई के लिए तरसते हैं, इस पर विचार करना जरूरी है- डॉ. मुन्ना कुमार शर्मा,अध्यक्ष सूर्यदेव पूजा समिति

आंकड़े एक नजर में
सितंबर 2026: तिलवाड़ा के पास एक सप्ताह में बदलाव (मिली ग्राम प्रति लीटर में)
जांच का मानक 21 सितंबर 28 सितंबर बदलाव
बीओडी             14.2        18         बढ़ी
सीओडी             73.6      84.8       बढ़ी
टीएसएस             114    126         बढ़ा

सितंबर 2026: ओखला बैराज के पास एक सप्ताह में बदलाव
जांच का मानक   21 सितंबर   28 सितंबर (मिलीग्राम प्रति लीटर में)
बीओडी             12            15
सीओडी             60            76
टीएसएस             99              104

अक्तूबर 2025: सेक्टर 11 के पास यूपीपीसी की रिपोर्ट
जांच का मानक 6 अक्तूबर    27 अक्तूबर (मिलीग्राम प्रति लीटर में)
बीओडी             70               72
सीओडी             348          336
टीएसएस             180          164

नाले का पानी यमुना नदी में न गिरे, इसके लिए प्रयास हो तो नदी का जलस्तर बेहतर हो सकता है, नियमित रूप से यमुना के जल में प्रदूषण की जांच होती है, उसके आधार पर बेहतर गुणवत्ता के लिए निर्णय लिए जाते हैं। -किशन सिंह, एई, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नोएडा

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