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ग्रेटर नोएडा: गौतम बुद्ध विवि में अंतरराष्ट्रीय एथोलॉजी सम्मेलन, विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव

गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में आयोजित 59वें अंतरराष्ट्रीय अनुप्रयुक्त एथोलॉजी सम्मेलन के दूसरे दिन भी पशु व्यवहार, पशु कल्याण और वैज्ञानिक अनुसंधान के नए आयामों पर गहन चर्चा जारी रही। सम्मेलन में पशु व्यवहार, पशु कल्याण, कृषि एवं पशुपालन, प्रयोगशाला पशु कल्याण, वन्यजीव प्रबंधन, साथी पशुओं की देखभाल, मानव-पशु संबंध तथा आधुनिक तकनीक के उपयोग जैसे विषयों पर विशेषज्ञ अपने शोध और अनुभव साझा कर रहे हैं। 

विशेषज्ञों ने कहा कि पशु व्यवहार का वैज्ञानिक अध्ययन अब केवल अकादमिक शोध तक सीमित नहीं है। इसका सीधा संबंध पशुओं के स्वास्थ्य, उत्पादकता और मानसिक एवं शारीरिक कल्याण से है। कृषि एवं पशुपालन में व्यवहार आधारित बेहतर आवास, पोषण और प्रबंधन विकसित किए जा सकते हैं, जबकि वन्यजीवों के व्यवहार का अध्ययन संरक्षण रणनीतियों को प्रभावी बनाने में मदद करता है।

गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन विश्वविद्यालय के लिए केवल अकादमिक आयोजन नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर ज्ञान, अनुसंधान और मानवीय मूल्यों को जोड़ने का महत्वपूर्ण अवसर हैं। उन्होंने कहा कि पशु कल्याण से जुड़े वैज्ञानिक अनुसंधान का उद्देश्य ऐसी व्यवस्थाओं का विकास करना होना चाहिए, जिनमें मनुष्य और पशु दोनों के हितों का संतुलन कायम हो। उन्होंने आधुनिक विज्ञान, तकनीक और पारंपरिक ज्ञान के समन्वय को पशु कल्याण और मानव-पशु सह-अस्तित्व की नई संभावनाओं के लिए महत्वपूर्ण बताया।

वहीं, सम्मेलन के आयोजन सचिव डॉ. विजय पाल सिंह ने कहा कि भारत में इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि सम्मेलन का विषय “शेयर्ड वर्ड्स” भारत की उस सांस्कृतिक भावना से जुड़ा है, जिसमें पूरी दुनिया को एक परिवार के रूप में देखने की परंपरा रही है। प्रयोगशाला अनुसंधान में भी पशु कल्याण को प्राथमिकता देते हुए वैकल्पिक और उन्नत वैज्ञानिक मॉडल विकसित करने पर जोर दिया गया।

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