कबीरधाम जिले के बाजार चारभाठा धान संग्रहण केंद्र से 22 हजार क्विंटल से अधिक धान के रहस्यमय ढंग से गायब होने का मामला अब गहराता जा रहा है। इस लापता धान की अनुमानित कीमत लगभग 7 करोड़ रुपये बताई जा रही है। प्रारंभिक तौर पर, अधिकारियों ने इस घटना का कारण चूहों द्वारा धान खाए जाना बताया था, लेकिन अब यह मामला एक बड़े राजनीतिक मुद्दा बन गया है। इस गंभीर प्रकरण की जांच की मांग को लेकर जोगी कांग्रेस पार्टी के सुप्रीमो अमित जोगी ने गुरुवार को बाजार चारभाठा धान संग्रहण केंद्र का दौरा किया। उन्होंने वहां काम कर रहे मजदूरों से चूहों की उपस्थिति और धान की कमी के संबंध में पूछताछ की।
इसके पश्चात, अमित जोगी कलेक्टर कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने एक ज्ञापन सौंपा। इस दौरान वे कार्यालय के द्वार पर ही धरने पर बैठ गए। उन्होंने आरोप लगाया कि कबीरधाम, महासमुंद और अन्य जिलों में करोड़ों रुपये के धान के गबन और कमीशन के खेल के पीछे सीधे तौर पर सरकार में बैठे तीन बड़े अधिकारी जिम्मेदार हैं। जोगी ने कहा कि केवल छोटे कर्मचारियों, जिन्हें वे "छोटे मुसवा" कहते हैं, को पकड़ने से इस घोटाले का पर्दाफाश नहीं होगा। उन्होंने इस पूरे मामले को "मुसवा घोटाला एक महाघोटाला" करार दिया और कहा कि यदि इसकी निष्पक्ष जांच हुई तो गबन के आंकड़े चौंकाने वाले होंगे। जोगी ने इस घोटाले की जांच के लिए "सीबीआई बिलाई" की आवश्यकता बताई, जिसका अर्थ है कि इस मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा की जानी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि सीबीआई जांच ही इस करोड़ों रुपये के घोटाले की सच्चाई सामने ला सकती है और जिम्मेदार अधिकारियों को जवाबदेह ठहरा सकती है। यह घटना धान खरीदी और भंडारण व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करती है।