जांजगीर-चांपा जिले में मछुआरा समाज ने मत्स्य विभाग के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन करते हुए कुलीपोटा स्थित मत्स्य कार्यालय के सामने चक्का जाम किया। प्रदर्शनकारियों ने मत्स्य विभाग के अधिकारियों पर पैसे लेकर गैर-मछुआरा समूहों को मछली पालन के लिए पट्टा देने का गंभीर आरोप लगाया। मछुआरा समाज के प्रदेशाध्यक्ष गायत्री गायग्वार के नेतृत्व में बड़ी संख्या में मछुआरे सड़क पर उतर आए।
आक्रोशित प्रदर्शनकारियों ने जांजगीर-चांपा मुख्य मार्ग को जाम कर दिया, जिससे आवागमन पूरी तरह बाधित रहा। करीब तीन घंटे तक चक्का जाम की स्थिति बनी रही। सूचना मिलते ही जिला प्रशासन और पुलिस बल मौके पर पहुंचा और आंदोलनकारियों को समझाइश दी। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे लंबे समय से विभागीय अधिकारियों को अपनी समस्याएं बताने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन उन्हें लगातार टाला जा रहा था। इसी कारण आज उनका गुस्सा सड़क पर फूट पड़ा।
मछुआरा समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने आरोप लगाया कि मत्स्य विभाग के अधिकारी सीताराम महिवार नियम-कायदों को ताक पर रखकर लेन-देन के जरिए गैर-मछुआरा समाज को तालाब और पट्टे आवंटित कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक पूरे मामले की निष्पक्ष जांच नहीं होती और दोषियों पर कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
वहीं जिला मत्स्य विभाग के सहायक मत्स्य अधिकारी सीताराम महिवार ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि तालाबों का आवंटन शासन के नियमों के अनुसार किया जाता है, जिसमें मछुआरा समाज को प्राथमिकता दी जाती है। कुछ मामलों में न्यायालय के आदेश पर भी पट्टे दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि अन्य समाज के आवेदकों को भी नियमानुसार पट्टा दिया जाता है।
चक्का जाम के दौरान मिले आवेदनों का एसडीएम ने परीक्षण किया और आंदोलनकारियों को भरोसा दिलाया कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद मछुआरा समाज ने चक्का जाम समाप्त किया। हालांकि आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट नहीं आई, तो वे दोबारा उग्र आंदोलन करेंगे।