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धान खरीदी को लेकर कांग्रेस का प्रदर्शन : तीन ब्लॉकों में SDM कार्यालय का घेराव, किसानों के साथ निकाली रैली

Wed, 28 Jan 2026 07:25 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, जांजगीर चांपा

जांजगीर-चांपा जिले के तीन ब्लॉकों में जिला कांग्रेस कमेटी और विधायकों के नेतृत्व में राज्य सरकार के धान खरीदी में ढुलमुल रवैये के विरोध में SDM कार्यालय का घेराव किया गया। आक्रोशित किसानों के साथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कचहरी चौक स्थित अंबेडकर प्रतिमा से रैली निकाली। इस दौरान पुलिस के सुरक्षा घेराव को तोड़ते हुए कांग्रेस कार्यकर्ता और किसान SDM कार्यालय पहुंचे। उन्होंने धान खरीदी शीघ्र शुरू करने और खरीदी लिमिट बढ़ाने की मांग को लेकर SDM को ज्ञापन सौंपा।

राज्य सरकार पर वादा खिलाफी का आरोप
कांग्रेसियों और किसानों ने राज्य सरकार पर वादा खिलाफी का आरोप लगाया। कांग्रेस नेताओं के अनुसार, भाजपा ने चुनाव पूर्व 'मोदी की गारंटी' के तहत किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल और प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान खरीदी का वादा किया था। इसके बावजूद, धान खरीदी प्रक्रिया शुरू से ही विवादों में रही। कांग्रेस का आरोप है कि जिला प्रशासन धान खरीदी के बजाय सत्यापन के नाम पर किसानों से जबरन धान समर्पण करवा रहा है। खेती के लिए सरकारी ऋण लेने वाले कई किसान धान बेचकर ऋण चुकाने की तैयारी में थे, लेकिन अब समर्थन मूल्य पर धान नहीं बिकने से उनकी चिंता बढ़ गई है।

विधायक ने उठाए सवाल, प्रशासन मौन
इस प्रदर्शन के दौरान जांजगीर विधायक ब्यास कश्यप भी किसानों के साथ रैली में शामिल हुए और कंधे पर धान की बोरी उठाकर SDM कार्यालय पहुंचे। उन्होंने राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि किसान खेत का धान बेचने के लिए भटक रहे हैं। विधायक कश्यप ने कहा कि पहले गिरदावरी के नाम पर रकबा घटाया गया, फिर एग्रीस्टैक पंजीयन के नाम पर किसानों को परेशान किया गया। अब सभी त्रुटियां सुधरने के बाद भी टोकन जारी करने में लापरवाही बरती जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार मौखिक आदेशों से जिला प्रशासन से किसानों को परेशान करवा रही है। इस मामले में जिला प्रशासन फिलहाल कुछ भी कहने से बचता नजर आ रहा है। कई किसानों का धान विभिन्न त्रुटियों के कारण अभी भी बिकना बाकी है। त्रुटियां सुधरने के बाद भी उन्हें टोकन का इंतजार है। किसानों ने राज्य सरकार से धान खरीदी की लिमिट बढ़ाने या खरीदी की तिथि आगे बढ़ाने की मांग की है, ताकि उन्हें अपनी उपज का उचित मूल्य मिल सके।

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