धमतरी जिले के गंगरेल बांध में मछली मारने के अनुबंध को राज्य सरकार ने निरस्त कर दिया है। सरकार के इस फैसले से करीब 5 हजार मछुवा परिवारों को मिलेगा सीधा रोजगार।जिससे मछुआरों में खुशी की लहर है।बता दें कि छत्तीसगढ राज्य सहकारी मत्स्य महासंघ मर्यादित रायपुर द्वारा गंगरेल जलाशय को कांकेर निवासी एक व्यक्ति को 1.16 करोड रुपये प्रतिवर्ष की दर से नीलामी में वर्ष 2023 में दिया गया था।गंगरेल बांध में 10 से अधिक मछुआ सहकारी समितियां कार्यरत हैं।जिसमें करीब 5 हजार मछुआ परिवार मत्स्याखेट कर अपनी आजीविका गंगरेल जलाशय से प्राप्त करते थे।वही वर्ष 2023 से पूर्व में गंगरेल जलाशय को समितियों को लीज पर प्रदान किया जाता था।जिससे गंगरेल जलाशय में कार्यरत मछुआ परिवारों को आजीविका मछली से प्राप्त होती थी।लेकिन वर्ष 2023 के बाद गंगरेल जलाशय की नीलामी से मछुआ परिवारों को काम मिलना कम हो गया।जिससे उनके आजीविका बुरी तरह प्रभावित हुआ,गंगरेल बांध में कार्यरत मछुआ सहकारी समितियों द्वारा जिला स्तर पर कलेक्टर को अपनी समस्या से अवगत कराया और मछुआ समिति के सदस्य मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से लगातार संपर्क कर अनुरोध किया।जिस पर मछुआरों की समस्याओं को ध्यान रखते हुए मुख्यमंत्री की पहल पर नियमानुसार कलेक्टर एवं छत्तीसगढ राज्य सहकारी मत्स्य महासंघ मर्यादित, रायपुर द्वारा गंगरेल बांध का अनुबंध निरस्त कर दिया गया और वर्तमान में रॉयल्टी के आधार पर मछुआरों को गंगरेल जलाशय में मत्स्याखेट की अनुमति प्रदान की गयी है।