चक्रवात 'अर्नब' के प्रभाव से 28 और 29 अक्टूबर को धमतरी सहित प्रदेश के कई क्षेत्रों में भारी बारिश, तेज हवाएं और गरज-चमक होने की आशंका है। मौसम की संभावित स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर है। धमतरी कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने नागरिकों से सतर्क रहने, किसानों को फसल की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने और नदी-नालों से दूर रहने की अपील की है। उन्होंने बताया कि हवा की रफ्तार लगभग 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। वहीं, बारिश और जलस्तर में वृद्धि होने पर रविशंकर सागर बांध (गंगरेल) से अधिक मात्रा में पानी छोड़ा जा सकता है।
कलेक्टर की अपील: फसल सुरक्षित करें, अभी बुवाई से बचें
कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने किसानों से अपील की है कि जिन खेतों में फसल कट चुकी है, वहां उपज को जल्द सुरक्षित स्थान पर पहुंचाएं। खड़ी फसल की स्थिति को देखते हुए आवश्यक सावधानी बरतें। मौसम की संभावित स्थिति को ध्यान में रखते हुए फिलहाल नई बुवाई से बचने की सलाह भी दी गई है। कलेक्टर ने कहा कि 28 और 29 अक्टूबर को भारी बारिश की स्थिति बनने पर स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों को बंद करने का निर्णय लिया जा सकता है। इस संबंध में फैसला परिस्थितियों के आकलन के बाद लिया जाएगा।
गंगरेल बांध से कभी भी छोड़ा जा सकता है पानी
संभावित भारी वर्षा और ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र से पानी की आवक बढ़ने की आशंका को देखते हुए जिले के जलाशयों की लगातार निगरानी की जा रही है। जलस्तर में वृद्धि होने पर गंगरेल बांध से किसी भी समय अधिक मात्रा में पानी छोड़ा जा सकता है। ऐसे में नदी किनारे, निचले इलाकों और जलप्रवाह वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
27 अक्टूबर 2026 की स्थिति में प्रमुख जलाशयों का विवरण इस प्रकार है:
गंगरेल बांध: वर्तमान जलस्तर 345.03 मीटर, पूर्ण जलाशय स्तर 348.70 मीटर, पानी की आवक 5,904 क्यूसेक और जीवित जलभराव क्षमता का उपयोग 59.53 प्रतिशत।
दुधावा बांध: वर्तमान जलस्तर 424.03 मीटर, पूर्ण जलाशय स्तर 425.12 मीटर, पानी की आवक 209 क्यूसेक और जलभराव क्षमता 84.21 प्रतिशत।
मुरूमसिल्ली बांध: जीवित जलभराव क्षमता का उपयोग 90.72 प्रतिशत।
सौंदूर बांध: वर्तमान जलस्तर 469.71 मीटर, पूर्ण जलाशय स्तर 471.065 मीटर, पानी की आवक 20 क्यूसेक और जलभराव क्षमता 82.73 प्रतिशत।
नदी-नालों और बिजली के खंभों से दूर रहने की सलाह
प्रशासन ने नागरिकों से नदी, नालों, पुल-पुलियों और तेज बहाव वाले क्षेत्रों के पास जाने से बचने की अपील की है। पानी पुल-पुलियों के ऊपर से बहने की स्थिति में उन्हें पार करने का प्रयास न करें। बच्चों और युवाओं को नदी-नालों में नहाने, मछली पकड़ने या पानी के तेज बहाव में उतरने से रोकने की सलाह दी गई है।
तेज हवा और गरज-चमक के दौरान पेड़ों, बिजली के खंभों और जर्जर भवनों से दूर रहें। अनावश्यक यात्रा से बचें और अपने परिवार के साथ-साथ पशुओं की सुरक्षा का भी ध्यान रखें। निचले और संभावित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले परिवार जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए तैयार रहें।
SDRF अलर्ट, जरूरत पर बुलाई जा सकती है NDRF
कलेक्टर ने बताया कि संभावित चक्रवाती प्रभाव को देखते हुए जिला प्रशासन ने आवश्यक तैयारियां कर ली हैं। एसडीआरएफ की टीम को अलर्ट पर रखा गया है और जरूरत पड़ने पर एनडीआरएफ की टीम भी बुलाई जा सकती है। प्रशासन ने नागरिकों से मौसम और जलाशयों से जुड़ी आधिकारिक सूचनाओं पर ध्यान देने, अफवाहों से बचने और किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन या आपदा प्रबंधन दल को तत्काल सूचित करने की अपील की है।