केदारनाथ मंदिर भवन पर आपदा के दौरान पड़े धुएं, मलबे आदि के निशान मिटाने के काम में एक मुसीबत सामने आ रही है।
पानी की लीकेज के कारण यह काम बाधित हो रहा है। भवन पर पड़े दागों को रसायन की मदद से हटाने की कोशिश में जुटे आर्कियोलाजिकल सर्वे आफ इंडिया (एएसआई) के विशेषज्ञों को खासी परेशानी उठानी पड़ रही है। लीकेज से मंदिर के अभिलेखों पर लगाया जाने वाला रसायन सूख नहीं पा रहा।
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उस पर मौसम भी एक दिक्कत बना हुआ है। जिन विशेषज्ञों को यहां का स्टैंपेज लेना है वे भी केदारनाथ में ही हैं। इनकी रिपोर्ट आने में तकरीबन डेढ़ माह का समय लगेगा। रिपोर्ट के बाद ही मंदिर के अभिलेखों का वास्तविक काल पता चल पाएगा। इस बीच पानी के ब्लाक चैनल्स पर फोकस स्टडी के लिए एक और टीम शनिवार को केदारधाम जाएगी।
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एएसआई के अधीक्षण पुरातत्वविद् (दून सर्किल) अतुल भार्गव के अनुसार विशेषज्ञों की इस टीम में डायरेक्टर केदारनाथ प्रोजेक्ट आरएस फोनिया, सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर आरएस जखमोला, ड्राफ्टसमैन के पांगती समेत कुछ और लोग शामिल हैं। बंद चैनल्स का सर्वे करने के बाद ही इन्हें खोले जाने की तकनीकों पर फैसला किया जाएगा। बकौल भार्गव जब तक मौसम साथ देगा, कार्य तभी तक हो पाएगा।
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