फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यहां रासलीला की चाह में शिव बने गोपी

Mon, 05 Aug 2013 05:20 PM IST
गोपेश्वर/राजा तिवारी
विज्ञापन
विज्ञापन
रुद्र हिमालय में स्थित गोपेश्वर को प्राचीन एंव पवित्रतम तीर्थ माना जाता है। पुराणों के अनुसार इंद्रियों के नियंता और पशुओं के पति भगवान शिव को जहां गोपेश्वर या गोपीनाथ भी कहा जाता है।
विज्ञापन


कृष्ण और राधा की रासलीला
शिव का नाम गोपीनाथ पड़ने के पीछे एक रोचक पौराणीक कथा है। लोकमान्यता है कि सृष्टि के रचनाकाल में जब गोलोक में भगवान श्री कृष्ण राधा के साथ रासलीला में लीन थे, तो उन्हें देख भगवान आशुतोष शिव में भी मां गौरा संग रासलीला करने इच्छा जागृत हुई।

तो भगवान शिव ने गोपी तथा माता गौरा ने गोप का वेष धारण कर रासलीला में मग्न हो गए। लेकिन त्रैलौक्यनाथ श्री कृष्ण को शिव और गौरा को पहचानने में देर नहीं लगी और उन्होंने मुस्कराते हुए भगवान शिव को गोपीनाथ की उपाधि प्रदान की।
विज्ञापन


गोपीनाथ मंदिर में बसते हैं शिव
तब से यहां भगवान शिव का कटुवा पत्थरों से बना विशाल मंदिर यहां स्थित है और यहां शिव को गोपीनाथ के नाम से जाना जाता है। पूर्व से ही यहां गोपीनाथ का मंदिर होने के कारण ही नगर का नाम गोपेश्वर पड़ा।

वहीं, गोपीनाथ मंदिर के पुजारी अरविंद भट्ट का कहना है कि शिव के गोपीनाथ नाम पड़ने की मान्यता को राजा सगर से जोड़ा जाता हैं। उनका कहना है कि राजा सगर की एक हजार गाय थी तथा ग्वालें उनकी गायों को चराने के लिए हिमालय के इस क्षेत्र में आते थे।

गाय खुद छोड देती थी शिवलिंग पर दूध
जिनमें से एक गाय सदैव जंगल में स्थित एक शिवलिंग को अपने दूध से स्नान करवाती थी। यह बात जब राजा सगर को बताई गई तो उन्होंने स्वयं यहां आकर पूरे घटनाक्रम को देखा।

तब उन्होंने ने यहां शिव मंदिर की स्थापना करवाई और उन्होंने इसे गोपीनाथ का नाम दिया। जिसके लते नगर का नाम गोपीनाथ पड़ गया। सावन के पवित्र माह में यहां शिव भक्तों का तांता लगा रहता है।
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें