स्टेट में चल रहा पावर गेम अब हर पल रोमांच बढ़ा रहा है। हरक सिंह रावत के अलावा किसी भी विधायक से अभी तक लालबत्ती नहीं छीनना यह साबित करता है, कि हरीश रावत ने इस राजनीतिक तापमान को कम करने के लिए फिलहाल एक खिड़की खुली छोड़ दी है। इशारा यही है कि यदि कोई आना चाहता है तो अपनी मंशा बता दे।
इस पूरे घटनाक्रम की वजह बने हरक सिंह रावत को मुख्यमंत्री एक दिन पहले ही कैबिनेट मंत्री पद से बर्खास्त कर चुके हैं। यूके उनियाल को महाधिवक्ता के पद से हटाकर विधायक सुबोध उनियाल से भी हिसाब चुकता कर लिया।
क्योंकि महाधिवक्ता, विधायक सुबोध उनियाल के भाई है। दो विधायक विजय बहुगुणा और अमृता रावत के पास कोई दायित्व नहीं है। वैसे भी हरीश रावत इन चारों विधायकों की वापसी नहीं चाहते।