हिमालयी क्षेत्र के जलस्रोतों के रास्ते बदल गए हैं। इस वजह से कई जगह जलस्रोत सूख गए हैं। अधिकांश जलस्रोतों में 70 से 90 फीसदी तक पानी कम हो गया है।
वैज्ञानिक इसका कारण जलवायु परिवर्तन और बीच-बीच में आ रहे भूकंप के झटकों को बता रहे हैं। वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान इसे पहले ही बता चुका है और अब उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (यूसैक) के सर्वेक्षण में इसकी पुष्टि हो रही है। गर्मी में पेयजल संकट की स्थिति और विकराल हो सकती है।
उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र ने प्रदेश में जलस्रोतों की मैपिंग का कार्य शुरू किया है। इसी सर्वेक्षण में कालसी के सदिया, विजाऊ, सकरौल, जड़ाऊ आदि क्षेत्रों के जलस्रोतों में 90 फीसदी तक पानी कम हो गया है। इससे वैज्ञानिक हैरत में हैं।
इसी तरह अन्य क्षेत्रों से भी जलस्रोतों के सूखने और पानी कम होने की शिकायतें आ रही हैं। शासन में बताए गए आंकड़ों को देखें तो जलस्रोत सूखने से तकरीबन 350 छोटी-बड़ी पेयजल परियोजनाएं बंद हो गई हैं। पेयजल किल्लत की यह स्थिति तो शुरुआती जांच में उजागर हुई है, लेकिन स्थिति और विकराल हो सकती है।